मां कहती थीं— “तुम सातों बेटियां ही मेरे बेटे हो…” ❤️
शायद कृष्ण देवी ने कभी नहीं सोचा होगा कि जिस दिन वह इस दुनिया से विदा होंगी, उनकी वही सात बेटियां उन्हें अपने कंधों पर आखिरी सफर तक लेकर जाएंगी। 😢
पति के निधन के बाद कृष्ण देवी ने अकेले अपनी सात बेटियों को पाला। मुश्किलें आईं, लेकिन मां कभी नहीं टूटीं। उन्होंने बेटियों को सिर्फ जन्म नहीं दिया, उन्हें हिम्मत दी, आत्मनिर्भर बनाया और हर परिस्थिति से लड़ना सिखाया।
शनिवार को जब मां की अर्थी उठी तो बेटियों ने किसी बेटे का इंतजार नहीं किया।
सातों बहनों ने बारी-बारी से मां की अर्थी को कंधा दिया। ❤️🩹
श्मशान पहुंचने के बाद जब सवाल उठा कि मां को मुखाग्नि कौन देगा, तो सबसे छोटी बेटी सोनी ने दृढ़ होकर कहा—
“मां ने हमें बेटों की तरह पाला है। वह कहती थीं कि तुम सब बेटियां ही मेरे लिए बेटे हो। हमने भी उन्हें कभी बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी। अब मां के अंतिम संस्कार के लिए हम किसी और का सहारा क्यों लें?”
और फिर सोनी ने अपनी मां को मुखाग्नि दी…
वह पल सिर्फ एक अंतिम संस्कार का पल नहीं था।
वह उस मां की पूरी जिंदगी का जवाब था, जिसने बेटियों को कभी बेटे से कम नहीं समझा।
और उन बेटियों का आखिरी प्रण था, जिन्होंने मां को जिंदगी भर अपना सहारा माना। 😭🙏
जिस मां ने सात बेटियों को संभालकर बड़ा किया, आज उन्हीं सात बेटियों ने मां को आखिरी विदाई दी।
बेटियां बोझ नहीं होतीं…
बेटियां मां-बाप का गर्व, सहारा और आखिरी सांस तक का अपना होती हैं। ❤️
🙏 कृष्ण देवी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
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