पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा उस एक साल की दुष्कर्म पीड़िता के परिवार से भी मिलेंगे, लेकिन कब
गांव जाएंगे तभी तो मिलेंगे, एक पक्ष को कार्यालय बुलाकर मुलाकात की, फिर दूसरे से कब मिलेंगे
क्या भीड़ की संख्या देखकर आरोपों की सच्चाई तय की जा रही?
एक सवाल सत्ता और विपक्ष दोनो से, अब तक उस गांव में जाने वाले कितने नेताओं ने उस एक साल की दुष्कर्म पीड़िता के परिवार से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली?
सुनी हुई बातो पर पूर्व मंत्री ने बयान दिया, उनके बीच रुपये लेनदेन का मामला था, उसी लेनदेन को लेकर फर्जी रेप की एफआईआर कराई गई है, पूर्व मंत्री जी इसका मतलब जिधर से आरोप लगाने वाले ज्यादा थे क्या आपको उनकी बात समझ आई? लेकिन उस बच्ची के परिवार की बात समझ नहीं आई, जिसने इतने गंभीर आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई ।
हाॅफ एनकाउंटर और लाठीचार्ज का विरोध करना तो ठीक है, लेकिन अब उस रेप की एफआईआर के पीछे आप रुपये लेनदेन का विवाद बता रहे हैं और फिर ये कहकर कि बताया जा रहा है, तो क्या ये वोट की राजनीति नही है? या फिर चुनाव करीब आ रहा है, ये उसका नतीजा है?
आप बोल रहे हैं दोनो परिवारों से मिलेंगे, लेकिन पुलिस ने मिलने का मौका कहां दिया, बीजेपी सरकार, डीएम और एसपी ने मिलने का मौका कहां दिया, आपसे सवाल है कि क्या आपको इन लोगों ने रोका था? फिर आपने मिलने की कोशिश क्यों नही की?
हाॅफ एनकाउंटर के बाद से अब तक पुलिस ने उस गांव में किसी भी नेता को जाने से नही रोका, भाजपा विधायक चेतराम, सपा नेता व पूर्व एमएलसी जयेश प्रसाद, जिलाध्यक्ष तनवीर खां, पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा सभी उस गांव में गए, क्या किसी ने एक बार भी उस एक साल की बच्ची के परिवार से मिलकर उसका दुख दर्द बांटने की कोई की?
ये प्रकरण थाना खुटार क्षेत्र में एक साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद आरोपी के हुए हाॅफ एकाउंटर और उसके बाद विरोध प्रदर्शन करने वालो पर हुए लाठीचार्ज की घटना से जुड़ा है। जिसको अब पूरी तरह से राजनीति मुद्दा बना दिया गया।