#चाय_पर_चर्चा_ने_निर्विरोध_मेयर_बनवाया..
भरतपुर। राजनीति के अखाड़े में 'साम, दाम, दंड, भेद' तो चलते रहते हैं, लेकिन भरतपुर नगर निगम में इस बार तो सीधे 'चाय-नाश्ते' से बाजी पलट गई। कल तक जो पूर्व मेयर शिव सिंह भोंट और उनका परिवार भाजपा सरकार पर अपने होटल में 'अधिकारियों वाली नाकाबंदी' और 'सेट-बैक का चक्कर' चलाकर दबाव बनाने के आरोप ठोक रहा था, आज वही परिवार गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम के साथ मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवा रहा है। कहानी में ट्विस्ट तब आया जब मंत्री बेढम खुद अपनी पुरानी दोस्ती का वास्ता देकर शिव सिंह के होटल पहुंचे। अब चाय की चुस्की के साथ ऐसा क्या जादू चला कि जो नेता जी कल तक बगावत की राह पर 'निर्दलीय' झंडा बुलंद किए खड़े थे, वो अचानक विकास के बहुत बड़े फैन बन गए। परिजनों के जो आरोप कल तक कड़वी हकीकत लग रहे थे, मंत्री जी के पहुंचते ही पलक झपकते ही 'अफवाह और मिथ्या' साबित हो गए। मंत्री जी ने भी बड़ी मासूमियत से कहा कि वो तो बस अपने पुराने मित्र से थोड़ी सियासी गपशप मारने आए थे और भोंट साहब का तो दिल इतना बड़ा निकला कि उन्होंने खुद चलकर पर्चा वापस लेने की पेशकश कर दी। शिव सिंह भोंट ने भी अपनी 'मजबूरी' नहीं, बल्कि 'दूरदर्शिता' दिखाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी शहर का इतना विकास कर रहे हैं कि बीच में कोई रोड़ा अटकाना ठीक नहीं लगा। नतीजा यह हुआ कि निर्दलीय दावेदार विचित्रा सिंह को मंत्री जी खुद अपनी गाड़ी में बिठाकर नगर निगम ले गए और प्यार से नामांकन वापस करवा दिया। अब जब बगावत की आग पर मंत्री जी ने एकदम ठंडा पानी डाल ही दिया है, तो वार्ड 61 की पार्षद अनुराधा सिंह जी के लिए मेयर की कुर्सी का रास्ता ऐसा साफ हुआ है मानो हाईवे पर ग्रीन कॉरिडोर बन गया हो। कुल मिलाकर, भरतपुर की राजनीति ने जता दिया कि यहां सियासी दुश्मनी से ज़्यादा भारी सालों पुरानी चाय वाली 'यारी' पड़ती है।