डॉ. जनक — जिन्होंने राजनीति को कभी अपना लक्ष्य नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम माना।
जिस व्यक्ति ने अपनी पूरी ज़िंदगी लोगों का दुख-दर्द सुना, खासकर जब कोई बुज़ुर्ग अपनी बीमारी लेकर उनके पास आता था, तो उन्होंने सिर्फ़ डॉक्टर बनकर नहीं, बल्कि उनके बेटे की तरह उनका दर्द समझा और उन्हें सहारा दिया।
जब उन्हें महसूस हुआ कि हमारे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की बहुत ज़रूरत है, तो उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया—ताकि व्यवस्था को भीतर से बेहतर बनाया जा सके और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकें।
पद बदल गया, जिम्मेदारी बढ़ गई, लेकिन डॉ. जनक ने अपना फर्ज़ और अपनी संवेदनशीलता कभी नहीं भूली।
आज भी उनके लिए जनता सिर्फ़ वोट नहीं, बल्कि उनका अपना परिवार है।
यही एक जनप्रतिनिधि की असली पहचान है। ❤️🙏
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Kullu, Kullu | Sep 3, 2026