जेईसी सोसायटी के तत्वाधान में भव्य आयोजन
विधि महाविद्यालय में प्रवेश तोरण का शिलान्यास और नई शिक्षा नीति पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजन
कोडरमा। झारखंड एजुकेशनल एंड कल्चरल सोसायटी के तत्वाधान में रविवार को स्थानीय विधि महाविद्यालय के सभागार में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान कॉलेज के मुख्य प्रवेश तोरण द्वार एवं चारदीवारी निर्माण का शिलान्यास किया गया, साथ ही "नई शिक्षा नीति 2020 की विधि शिक्षा में प्रासंगिकता और आवश्यकता" विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ। इसके अलावा छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए सहायता कक्ष (हेल्प डेस्क) और छात्राओं के लिए अलग फीस काउंटर का भी उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बेहद गरिमामयी माहौल में हुई। मुख्य प्रवेश तोरण और चारदीवारी का शिलान्यास मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. चंद्र भूषण शर्मा एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और सनातन रीति-रिवाज के साथ किया गया। इसके बाद, मुख्य सभागार (कॉन्फ्रेंस हॉल) की ओर बढ़ते हुए अतिथियों का स्वागत झारखंड की पारंपरिक आदिवासी नृत्य शैली और मधुर संगीत के साथ किया गया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ कुलपति डॉ. चंद्र भूषण शर्मा व अन्य मंचस्थ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और धार्मिक स्तुति के साथ हुआ।
विधि शिक्षा को आधुनिक और रोजगारपरक बनाने की जरूरत: कुलपति
संस्था के संस्थापक सचिव डॉ. डी. एन. मिश्रा के स्वागत वक्तव्य के साथ मुख्य सत्र की शुरुआत हुई। अपने अध्यक्षीय व मुख्य संबोधन में कुलपति डॉ. चंद्र भूषण शर्मा ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत विधि (कानून) की पढ़ाई में आ रहे बदलावों और इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान आधुनिक युग की मांग को देखते हुए कानून की पढ़ाई को और अधिक व्यावहारिक, वास्तविक और कर्म संस्थानमुखी (रोजगारपरक) बनाने की सख्त जरूरत है। कुलपति ने वर्ष 2003 में स्थापित इस विधि महाविद्यालय के क्रमिक विकास और इसकी प्रगति पर प्रसन्नता और आश्चर्य व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने कॉलेज प्रबंधन और छात्रों को आश्वस्त करते हुए वचन दिया कि इसी सत्र से यहाँ एलएलबी (3 वर्षीय ऑनर्स) और एलएलएम पाठ्यक्रमों की मान्यता प्रदान कर दी जाएगी। इस घोषणा का सभागार में मौजूद जेईसी सोसायटी के तहत संचालित चारों संस्थानों के व्याख्याताओं, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। सेमिनार के दौरान मंच से अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी नई शिक्षा नीति की विशेषताओं, इसकी पारदर्शिता, प्रायोगिकता और उपयोगिता पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। इस अवसर कुलानुशासक सादिक रजा, नगर परिषद अध्यक्ष रमेश हर्षधर, सीएनएलयू पटना के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार, पटना लॉ कॉलेज के प्रो. डॉ. सलीम जावेद, झारखंड बार काउंसिल (रांची) के उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला, एमजी काशी विद्यापीठ (वाराणसी) के विभागाध्यक्ष जी. पी. पाण्डेय, प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. विद्यानंद पांडे और साउथ बिहार सेंट्रल यूनिवर्सिटी (गया) के प्रो. डॉ. अवधेश कुमार सहित कई दिग्गजों ने अपने विचार साझा किए।
मेधावी छात्र और प्रतियोगिता के विजेता हुए सम्मानित
दोपहरिक के भोजन के बाद सेमिनार का दूसरा सत्र शुरू हुआ। इसमें बचे हुए वक्ताओं ने अपने विचार रखे, जिसके बाद कॉलेज के मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। पिछले सम-सत्र के एलएलबी और बीए-एलएलबी की अंतिम परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक लाने वाले टॉपर्स को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कॉलेज में आयोजित सांस्कृतिक अनुष्ठान, रंगोली प्रतियोगिता और खेलकूद प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर पुरस्कृत किया गया। सत्र के अंतिम चरण में सेमिनार के विषय पर एक जीवंत प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित हुआ, जहाँ श्रोताओं और वक्ताओं के बीच तर्कपूर्ण चर्चा हुई। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम का कुशल संयोजन और संचालन संस्था के संस्थापक व्याख्याता व वरीय अधिवक्ता प्रो. आत्मानंद कुमार पांडे, झारखंड शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय यादव और झारखंड इवनिंग डिग्री कॉलेज की प्रो. मजहबी परवीन ने संयुक्त रूप से किया। उन्होंने झारखंड विधि महाविद्यालय की स्थापना काल से लेकर आज तक के सफर और इसके क्रमिक उन्नयन के गौरवशाली इतिहास को सामने रखा। इस विशेष अवसर पर समाज और संस्थान में योगदान देने वाले दानदाता सदस्यों में कला देवी, डॉ. मनीष पंकज और डॉ. प्रियंका को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मौके पर बार काउंसिल के अध्यक्ष जगदीश सलूजा, विधि महाविद्यालय के सदस्य प्रदीप कुमार सिंह, विनोद सिन्हा और अभियंता विजय कुमार सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। आयोजन में महाविद्यालय के प्रो. डॉ. विकास राय, डॉ. कौशल कुमार, डॉ. एस. के. पांडे, डॉ. अरुण कुमार सिंह, प्रो. राघवेंद्र प्रसाद दत्त, डॉ. अरमान हुसैन, डॉ. अनिल कुमार, प्रो. उज्ज्वल कुमार, प्रो. सुशीला देवी, सुप्रभा रानी लोंगा, नीरज कुमार सिन्हा, वी. के. सिंह, पी. के. सिंह, आर. बी. पाण्डेय, अमित कुमार, ललन कुमार और शंभू शरण सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।