कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान में घमंड साफ़ झलक रहा है। पत्रकारों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी न सिर्फ़ निंदनीय है, बल्कि एक जिम्मेदार सार्वजनिक व्यक्ति की गरिमा के भी विपरीत है।
बागेश्वर धाम सरकार
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