चार कंधे... और एक सवाल।
साल 2026।
जब देश विकास की नई ऊंचाइयों की बात कर रहा है, तब उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कपकोट ब्लॉक के जटोली गांव में एक बीमार इंसान को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस नहीं, बल्कि चार इंसानी कंधों का सहारा लेना पड़ रहा है।
दो लकड़ी के डंडे, एक रस्सी, एक चादर... और इन्हीं से तैयार हुआ एक अस्थायी स्ट्रेचर। क्योंकि गांव तक सड़क नहीं है। एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती। मोबाइल नेटवर्क नहीं है। सबसे नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र भी 10 किलोमीटर से अधिक दूर है।
सोचिए... बीमारी से जूझ रहा एक व्यक्ति दर्द सह रहा है, और उसके अपने हर कदम पर इस डर के साथ चल रहे हैं कि कहीं रास्ते में कुछ अनहोनी न हो जाए।
यह सिर्फ़ एक गांव की कहानी नहीं है।
यह उत्तराखंड के सैकड़ों गांवों की कहानी है।