EWS व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार की मांग को लेकर रविन्द्र सिंह भाटी का अभियान तेज, 25 सितंबर से प्रदेशव्यापी यात्रा
पिंक सिटी प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर विधायक ने रखीं EWS पात्रता, प्रमाण-पत्र, आयुसीमा और शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ी प्रमुख मांगें
जयपुर, 22 सितंबर। शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने मंगलवार को जयपुर स्थित पिंक सिटी प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की आरक्षण व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, न्यायसंगत और प्रभावी बनाने से संबंधित विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया। भाटी ने कहा कि देश की भौगोलिक, कृषि एवं आर्थिक परिस्थितियों में व्यापक विविधता है, ऐसे में EWS पात्रता के लिए पूरे देश में एक समान संपत्ति संबंधी मानदंड कई राज्यों की जमीनी परिस्थितियों के अनुरूप नहीं बैठते।
उन्होंने बताया कि EWS आरक्षण व्यवस्था संसद द्वारा पारित किए जाने के बाद 12 जनवरी 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ देशभर में लागू हुई थी। राजस्थान में फरवरी 2019 से सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में EWS वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। हालांकि, समय-समय पर कुछ प्रक्रियात्मक सुधार किए गए हैं, लेकिन केंद्र स्तर पर EWS अभ्यर्थियों से जुड़ी कई व्यावहारिक कठिनाइयां अभी भी बनी हुई हैं।
भाटी ने कहा कि राजस्थान जैसे राज्यों में कृषि भूमि की उत्पादकता, सिंचाई की उपलब्धता और स्थानीय भूमि मूल्यों में व्यापक अंतर है। ऐसे में केवल भूमि के आकार को आर्थिक स्थिति का आधार मानना वास्तविक आर्थिक क्षमता का सटीक आकलन नहीं करता। उन्होंने मांग की कि EWS पात्रता निर्धारित करते समय भूमि के आकार के साथ उसकी उत्पादकता, सिंचाई सुविधा, स्थानीय भूमि मूल्य और वास्तविक आर्थिक उपयोगिता जैसे कारकों को भी ध्यान में रखा जाए।
राज्यवार परिस्थितियों के अनुरूप EWS नियम बनाने की मांग
विधायक ने कहा कि राजस्थान एवं गुजरात सहित कुछ राज्यों ने स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए EWS प्रमाण-पत्र से संबंधित प्रावधानों में अपने स्तर पर बदलाव किए हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि राज्यों द्वारा जारी EWS प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय सेवाओं एवं केंद्रीय शिक्षण संस्थानों के लिए भी मान्यता दी जाए, ताकि अभ्यर्थियों को केंद्र और राज्य के लिए अलग-अलग प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया से राहत मिल सके।
उन्होंने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2022-23 में राजस्थान सरकार द्वारा 2,77,555 EWS प्रमाण-पत्र जारी किए गए, जबकि केंद्र सरकार द्वारा 95,243 EWS प्रमाण-पत्र जारी हुए। उनके अनुसार यह अंतर EWS प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया को अधिक सरल और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
आयुसीमा, आवेदन शुल्क और प्रमाण-पत्र की वैधता में राहत की मांग
भाटी ने EWS अभ्यर्थियों को अन्य आरक्षित वर्गों की तरह प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिकतम आयुसीमा, आवेदन शुल्क तथा जहां लागू हो, न्यूनतम अर्हताओं में उचित छूट देने की मांग रखी। साथ ही उन्होंने EWS प्रमाण-पत्र की वर्तमान एक वर्ष की वैधता को बढ़ाकर तीन अथवा पांच वर्ष किए जाने तथा निर्धारित शर्तों के तहत शपथ-पत्र के आधार पर इसके नवीनीकरण की व्यवस्था करने का प्रस्ताव रखा।
EWS आय निर्धारण की प्रक्रिया सरल करने पर जोर
पत्रकार वार्ता में परिवार की आय की गणना से संबंधित प्रक्रिया को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया। भाटी ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में परिवार की परिभाषा में विभिन्न संबंधों को शामिल किए जाने के कारण कई मामलों में आय निर्धारण की प्रक्रिया जटिल हो जाती है। विशेष रूप से विवाहित महिला अभ्यर्थियों को मायके और ससुराल दोनों पक्षों से जुड़े दस्तावेजों एवं प्रक्रियाओं के कारण व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने मांग की कि EWS आय निर्धारण की प्रक्रिया को अन्य आरक्षण व्यवस्थाओं में प्रयुक्त आय/क्रीमीलेयर निर्धारण की तर्ज पर सरल बनाया जाए और माता-पिता की आय को प्रमुख आधार मानते हुए स्पष्ट एवं व्यावहारिक नियम निर्धारित किए जाएं।
छात्रवृत्ति और राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत व्यवस्था की मांग
भाटी ने EWS वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, छात्रावास तथा अन्य शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी अवसरों में समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ऐसी सुविधाओं की आवश्यकता है।
इसके अतिरिक्त, EWS से संबंधित नीतिगत एवं प्रशासनिक समस्याओं के समेकित समाधान के लिए राष्ट्रीय आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन पर विचार करने की मांग भी रखी गई।
पंचायती राज एवं नगर निकाय में EWS प्रतिनिधित्व की मांग
भाटी ने स्थानीय स्तर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों में EWS वर्ग के लिए उपयुक्त प्रतिनिधित्व की व्यवस्था किए जाने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि इससे स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की भागीदारी बढ़ेगी और उनके मुद्दों को निर्णय प्रक्रिया में स्थान मिल सकेगा।
75 से अधिक विधायकों का समर्थन, सांसदों से भी संपर्क
रविन्द्र सिंह भाटी ने बताया कि राजस्थान के 75 से अधिक विधायक इन मांगों के समर्थन में अपनी लिखित सहमति एवं समर्थन पत्र दे चुके हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश के सांसदों से भी व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर उन्हें EWS से जुड़े विषयों और प्रस्तावित सुधारों से अवगत कराया गया है। प्रेस ब्रीफ के अनुसार संबंधित सांसदों ने भी इस मांग के प्रति सकारात्मक रुख व्यक्त करते हुए मौखिक रूप से अपनी सहमति एवं समर्थन का आश्वासन दिया है।
25 सितंबर से प्रदेशभर में यात्रा करेंगे भाटी
पत्रकार वार्ता के दौरान रविन्द्र सिंह भाटी ने इन मांगों को व्यापक स्तर पर जनता और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने के लिए 25 सितंबर 2026 से प्रदेशभर में यात्रा शुरू करने की घोषणा की। यात्रा के दौरान EWS व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं, प्रस्तावित सुधारों और समान अवसर से संबंधित मांगों को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में संवाद किया जाएगा।
भाटी ने कहा कि EWS आरक्षण का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अवसर उपलब्ध कराना है और इसके लिए पात्रता एवं प्रमाण-पत्र की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो देश के अलग-अलग राज्यों की वास्तविक सामाजिक, कृषि एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखे।
उन्होंने केंद्र सरकार से EWS पात्रता एवं संपत्ति संबंधी वर्तमान मानदंडों की व्यापक समीक्षा करते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को EWS आरक्षण का उद्देश्यपूर्ण और प्रभावी लाभ मिल सके।
Ravindra Singh Bhati
Barmer, Barmer | Sep 22, 2026