फोरलेन टनल निर्माण से संजौली समेत आसपास के इलाकों में मकानों पर खतरा, सरकार गंभीर
कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मिला प्रतिनिधिमंडल, बोले—नुकसान की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना जरूरी
फोरलेन टनल निर्माण के चलते संजौली, भट्टा कुफर और ढली क्षेत्र में मकानों को हो रहे नुकसान का मामला अब सरकार के दरवाजे तक पहुंच गया है। टनल निर्माण से प्रभावित शांतिबिहार क्षेत्र के एक प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मुलाकात कर मामले में सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने टनल निर्माण के कारण मकानों में आई दरारों और पैदा हुए खतरे से मंत्री को अवगत करवाया।
संजौली, भट्टा कुफर और ढली इलाके में फोरलेन टनल निर्माण के कारण मकानों को हो रहे नुकसान को लेकर कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने गंभीर चिंता जताई है। शांतिबिहार इलाके के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से मुलाकात कर सरकार से मामले में हस्तक्षेप की मांग की। मंत्री ने कहा कि टनल निर्माण से प्रभावित क्षेत्रों में घरों में दरारें आने और खतरा पैदा होने की शिकायतें सामने आई हैं और सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है।
अनिरुद्ध सिंह के मुताबिक संजौली, भट्टा कुफर और ढली क्षेत्र में टनल निर्माण के चलते करीब 13 से 14 इमारतों में बड़ी दरारें आने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि इन इमारतों की स्थिति चिंताजनक है और प्रभावित मकानों पर खतरा बना हुआ है। कैबिनेट मंत्री ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए सब-स्टैंडर्ड कार्य किए जाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि एनएचएआई के अधिकारियों को हिमाचल के हितों और लोगों की जान-माल की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। मंत्री ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की ओर से कंपनियों को लाभ पहुंचाने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोगों की सुरक्षा और उनके मकानों को हुए नुकसान का मामला गंभीर है।
वहीं, शिमला के उपायुक्त ने प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने के बाद फिलहाल निर्माण कार्य के लिए दी गई अनुमति वापस ले ली है और काम रोकने के आदेश जारी किए हैं। इसके बाद अब सरकार मामले की उच्चस्तरीय जांच की तैयारी में है।
कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। इस बैठक में पर्यावरणविदों, भूवैज्ञानिकों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक हाई पावर कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि समिति की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश को दी जानी चाहिए, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
मंत्री ने कहा कि जांच के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि टनल निर्माण से मकानों को हुए नुकसान के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही प्रभावित लोगों के नुकसान और उनकी सुरक्षा को लेकर भी उचित कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।