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आज राजस्थान भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष बड़े चंद्रशेखर आजाद जी, राष्ट्रीय महासचिव एड. रविंद्र भाटी जी सामाजिक न्याय महासम्मेलन राजस्थान के जयपुर में सम्पन्न हुआ विशाल जनसभा को सम्बोधित किया जय भीम ,जय भारत

42.1k views | Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Aug 20, 2023

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भोपाल 🆕 मध्य प्रदेश पुलिस के मुखिया DGP श्री कैलाश मकवाणा के विशेष प्रयासों के चलते 59 पुलिस अधिकारी-
कर्मचारियों को मिला के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार।

DGP श्री कैलाश मकवाणा ने वर्ष 2022-23 एवं वर्ष 2023-24 के लिए घोषित किए के.एफ. रुस्तम जी पुरस्कार।

वर्ष 2022-23 के लिए 24 एवं वर्ष 2023-24 के लिए 35 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिला परम विशिष्‍ट, अति विशिष्‍ट एवं विशिष्‍ट श्रेणी का के.एफ.रूस्‍तम जी पुरस्‍कार।
             सूची 👇👇👇👇

#MP

भोपाल 🆕 मध्य प्रदेश पुलिस के मुखिया DGP श्री कैलाश मकवाणा के विशेष प्रयासों के चलते 59 पुलिस अधिकारी- कर्मचारियों को मिला के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार। DGP श्री कैलाश मकवाणा ने वर्ष 2022-23 एवं वर्ष 2023-24 के लिए घोषित किए के.एफ. रुस्तम जी पुरस्कार। वर्ष 2022-23 के लिए 24 एवं वर्ष 2023-24 के लिए 35 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिला परम विशिष्‍ट, अति विशिष्‍ट एवं विशिष्‍ट श्रेणी का के.एफ.रूस्‍तम जी पुरस्‍कार। सूची 👇👇👇👇 #MP

Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Jun 4, 2026

प्रेस विज्ञप्ति

गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध) — ज़िला फर्रुखाबाद में जगद्गुरु शंकराचार्य जी का विस्तृत आशीर्वचन 

 *'दस वर्ष का विश्वास—तीन कार्यकाल—तीन बहाने—कोई घोषणा नहीं'—'महाराष्ट्र CM एकनाथ शिंदे ने गौ माता को राज्य माता घोषित किया—योगी क्यों नहीं कर सकते ?'*

 *'गंगा राष्ट्र नदी घोषित हुई — 29 वर्षों में ₹1,825 करोड़ से बजट ₹43,000 करोड़ हुआ — गौ माता को राष्ट्र माता घोषित से वही परिवर्तन आएगा'*

 *'इस बकरीद मुसलमानों ने गाय नहीं खरीदी — लाखों गायें बचीं — भाजपा ने उन्हें पशु बुद्धि कहा'*

ज़िला: फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश | 
मूल मंत्र: "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ"

*"हम इस यात्रा पर कोई और रास्ता न बचने पर निकले हैं। एक के बाद एक हर राजनीतिक पार्टी ने हमारा विश्वास लिया, गौ माता के लिए वादा किया और फिर भूल गई। पहले कार्यकाल में ढाई साल मांगे, दूसरे में कोई बात करने को तैयार नहीं, तीसरे का आधा बीत गया और केंद्रीय कानून मंत्री कहते हैं: ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन ही नहीं है। इसलिए सीधे मतदाता के पास आना पड़ा।"— 'परमाराध्य' परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती '१००८'*

फर्रुखाबाद। ऐतिहासिक 81 दिवसीय 'गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध)' (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में 'परमाराध्य' परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती '१००८' ने ज़िला फर्रुखाबाद में जगह-जगह विशाल जनसभाओं को संबोधित किया। प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ" का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।
दस वर्ष — तीन कार्यकाल — तीन बहाने — कोई घोषणा नहीं
महाराजश्री ने दशक भर के धोखे का विस्तृत विवरण दिया। एक पार्टी आई जो हिंदू हितों की रक्षक होने का दावा करती थी — गौ माता की रक्षा उनमें शामिल थी। हमने बाकी पार्टियों से नाता तोड़ कर इन्हें पूर्ण बहुमत दिया। पहले कार्यकाल में कहा: 'ढाई साल जम लेने दो।' हमने प्रतीक्षा की। फिर कहा: विदेश में भी जमना है, बीफ निर्यात से कूटनीतिक दिक्कत हो सकती है। फिर चुनाव आचार संहिता का बहाना। दूसरे कार्यकाल में बात करने को कोई तैयार नहीं था। तीसरा कार्यकाल आधा बीत गया। जब पत्रकारों ने हाल ही में केंद्रीय कानून मंत्री से पूछा कि क्या गाय को राष्ट्र माता घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है, तो उत्तर था: "ऐसा कोई प्रस्ताव हमारे सामने विचाराधीन नहीं है।" 'संसद में कई सांसद private member Bill लाए — लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें floor तक नहीं पहुँचने दिया और मंत्री कहते हैं: कोई प्रस्ताव ही नहीं है।'
'घोषणा की ज़रूरत नहीं — तो CM की घोषणा की ज़रूरत क्यों पड़ी ?'
महाराजश्री ने UP CM के उस बयान का तीखा खंडन किया, जिसमें उन्होंने एक सभा में कहा: 'गाय जन्म-जन्मांतर की माता है — इस नाते के लिए घोषणा की क्या ज़रूरत?' उस सभा में आधी जनता भी ताली नहीं बजा रही थी। 'वे जानते थे कि यह खोखला है।'
महाराजश्री ने कहा: 'आप मतगणना केंद्र पर बैठे थे। आपको पता था कि जीत गए, लेकिन बाहर नहीं निकले। कोई भी नहीं निकलता। क्यों ? क्योंकि जब तक अधिकारी माइक पर घोषणा नहीं करता — "यह प्रत्याशी विजयी घोषित" — protocol नहीं मिलता। घोषणा होते ही, शपथ से पहले ही, आपका protocol शुरू हो गया था। घोषणा का महात्म्य यही है। वह अनिश्चय समाप्त करती है। थाने का थानेदार आज संशय में है: गौरक्षक कहता है माता है, ट्रांसपोर्टर कहता है पशु है — किसे माने ? राज्य की घोषणा उसे road map देगी। यही हम माँग रहे हैं।'
'महाराष्ट्र CM एकनाथ शिंदे ने गौ माता को राज्य माता घोषित किया — कोई संवैधानिक संकट नहीं आया — योगी क्यों नहीं ?'
महाराजश्री ने महाराष्ट्र का निर्णायक उदाहरण रखा: 'एकनाथ शिंदे — एक छोटी पार्टी के नेता, गठबंधन सरकार के मुखिया — ने महाराष्ट्र में गाय को राज्य माता घोषित किया। न कोई कानूनी चुनौती आई, न संवैधानिक संकट, न न्यायालय ने रोका। अगर एक छोटी पार्टी का नेता यह कर सकता है — तो देश के सबसे बड़े राज्य के मुखिया, जो भगवा वस्त्र पहनते हैं, जो गोरक्षपीठ के महंत हैं, जो हिंदू हृदय सम्राट कहलाते हैं — उनके सामने कौन सी बाधा है? हमने सार्वजनिक रूप से बार- बार पूछा: बताइए कौन अड़ा है — मुसलमान ? सपा ? कांग्रेस ? हम उसे ठीक करते हैं। कोई नाम नहीं बताया। लोग अनुमान लगाते हैं कि बूचड़खाने से आने वाला चंदा कारण है। हम यह नहीं कहते — लेकिन जब सच नहीं बताओगे तो अनुमान यही लगेगा।'
गंगा राष्ट्र नदी का दृष्टांत — घोषणा से सब कुछ बदल गया
महाराजश्री ने अपने स्वयं के आंदोलन का शक्तिशाली दृष्टांत दिया। उन्होंने मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार के खिलाफ गंगा को राष्ट्र नदी घोषित करवाने का आंदोलन चलाया। आंदोलन सफल हुआ। घोषणा से पहले: 29 वर्षों में गंगा कार्य योजना में केवल ₹1,825 करोड़ खर्च हुए। घोषणा के बाद: ₹43,000 करोड़ का budget निर्धारित हुआ — और नमामि गंगे में अब तक ₹22,000 करोड़ खर्च हो चुके हैं।
उन्होंने कहा: 'घोषणा से पहले 5 राज्य 5 तरह से गंगा का इलाज करते थे — एक allopathy, एक homeopathy, एक Ayurveda। घोषणा के बाद एक केंद्रीय authority, एक road map, एक विशाल budget। गौ माता के साथ वही परिवर्तन आएगा। स्कूल की पाठ्यपुस्तकें बदलेंगी, थाने को road map मिलेगा, सरकार का रुपया गौ रक्षा पर लगेगा। इसलिए घोषणा मायने रखती है।' उन्होंने यह भी बताया कि यह उनके गुरुजी का ही आदेश था जिस पर राजीव गांधी ने गंगा कार्य योजना और राम जन्मभूमि का ताला खुलवाया था — 'हम कभी किसी एक पार्टी के नहीं रहे।'
'स्कूली पाठ्यपुस्तक: गाय एक पशु है, जिससे दूध और मांस मिलता है — 6-7 साल के बच्चों को यह सिखाया जा रहा है'
महाराजश्री ने एक अत्यंत चिंताजनक उदाहरण दिया: एक प्रमुख school chain की कक्षा 2 की पाठ्यपुस्तक में लिखा है — 'गाय एक पशु है। इससे हमें दूध और मांस मिलता है।' 'छह-सात साल के बच्चे को यह सिखाया जा रहा है: जब दूध बंद हो जाए तो मांस खाओ। यही हमारी अगली पीढ़ी को दिया जा रहा है। जिस दिन गाय को राष्ट्र माता घोषित किया जाएगा, यह पाठ्यपुस्तकें बदलनी पड़ेंगी। अकेले इसी एक कारण से घोषणा अनिवार्य है।'
'इस बकरीद मुसलमानों ने गाय नहीं खरीदी — लाखों बचीं — भाजपा ने उन्हें पशु बुद्धि कहा'
महाराजश्री ने हमारे समय की एक गहरी विडंबना व्यक्त की। इस बकरीद पर मुस्लिम समाज ने — एक अभूतपूर्व सामूहिक निर्णय में — गाय नहीं खरीदी। कहीं से कोई समाचार नहीं आया कि किसी मुसलमान ने गाय काटी। लाखों गायें बचीं। 'एक सच्चे हिंदू को प्रसन्न होना चाहिए था। शत्रु भी अच्छा काम करे तो उसकी प्रशंसा करने का जिगर रखना चाहिए। सही प्रतिक्रिया होती: बहुत अच्छा किया, इसे स्थायी बनाओ। इसके बजाय उन्हें पशु बुद्धि कहा गया। यह कौन सा तर्क है ? उन्होंने लाखों गौ माताओं को बचाया। हमें इतना नैतिक साहस तो रखना ही चाहिए कि अच्छे काम की तारीफ कर सकें — चाहे वह किसी से भी आए। और इतना साहस भी कि अपने का बुरा काम देखकर कह सकें : यह गलत है।'
सामूहिक संकल्प — चक्रधारी मुद्रा
महाराजश्री ने उपस्थित जनसमुदाय से सामूहिक घोषणा करवाई:
"मैं घोषणा करता/करती हूँ कि गाय मेरी माता है। उन्हें पशु कहने से मुझे पीड़ा होती है। आज से उन सबसे जो गौ माता को चोट पहुँचाते हैं — मेरा संबंध टूटा। आने वाले चुनाव में vote अवश्य दूँगा — लेकिन केवल उस पार्टी या प्रत्याशी को जो माता घोषित करके आए।"
तत्पश्चात चक्रधारी मुद्रा में वैदिक संकल्प "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ" का सामूहिक उच्चारण कराया गया। महाराजश्री ने स्मरण दिलाया: 'हमने कांग्रेस के खिलाफ, बसपा के खिलाफ, सपा के खिलाफ आंदोलन किए हैं। इस सरकार को भी जवाबदेह ठहरा रहे हैं। जो घोषणा करे — vote उसी का।'
24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प
3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारंभ हुई गविष्ठि यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी।
मीडिया टीम
'परमाराध्य' परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती '१००८'
संपर्क सूत्र: +91 98396 42008

प्रेस विज्ञप्ति गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध) — ज़िला फर्रुखाबाद में जगद्गुरु शंकराचार्य जी का विस्तृत आशीर्वचन *'दस वर्ष का विश्वास—तीन कार्यकाल—तीन बहाने—कोई घोषणा नहीं'—'महाराष्ट्र CM एकनाथ शिंदे ने गौ माता को राज्य माता घोषित किया—योगी क्यों नहीं कर सकते ?'* *'गंगा राष्ट्र नदी घोषित हुई — 29 वर्षों में ₹1,825 करोड़ से बजट ₹43,000 करोड़ हुआ — गौ माता को राष्ट्र माता घोषित से वही परिवर्तन आएगा'* *'इस बकरीद मुसलमानों ने गाय नहीं खरीदी — लाखों गायें बचीं — भाजपा ने उन्हें पशु बुद्धि कहा'* ज़िला: फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश | मूल मंत्र: "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ" *"हम इस यात्रा पर कोई और रास्ता न बचने पर निकले हैं। एक के बाद एक हर राजनीतिक पार्टी ने हमारा विश्वास लिया, गौ माता के लिए वादा किया और फिर भूल गई। पहले कार्यकाल में ढाई साल मांगे, दूसरे में कोई बात करने को तैयार नहीं, तीसरे का आधा बीत गया और केंद्रीय कानून मंत्री कहते हैं: ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन ही नहीं है। इसलिए सीधे मतदाता के पास आना पड़ा।"— 'परमाराध्य' परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती '१००८'* फर्रुखाबाद। ऐतिहासिक 81 दिवसीय 'गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध)' (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में 'परमाराध्य' परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती '१००८' ने ज़िला फर्रुखाबाद में जगह-जगह विशाल जनसभाओं को संबोधित किया। प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ" का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया। दस वर्ष — तीन कार्यकाल — तीन बहाने — कोई घोषणा नहीं महाराजश्री ने दशक भर के धोखे का विस्तृत विवरण दिया। एक पार्टी आई जो हिंदू हितों की रक्षक होने का दावा करती थी — गौ माता की रक्षा उनमें शामिल थी। हमने बाकी पार्टियों से नाता तोड़ कर इन्हें पूर्ण बहुमत दिया। पहले कार्यकाल में कहा: 'ढाई साल जम लेने दो।' हमने प्रतीक्षा की। फिर कहा: विदेश में भी जमना है, बीफ निर्यात से कूटनीतिक दिक्कत हो सकती है। फिर चुनाव आचार संहिता का बहाना। दूसरे कार्यकाल में बात करने को कोई तैयार नहीं था। तीसरा कार्यकाल आधा बीत गया। जब पत्रकारों ने हाल ही में केंद्रीय कानून मंत्री से पूछा कि क्या गाय को राष्ट्र माता घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है, तो उत्तर था: "ऐसा कोई प्रस्ताव हमारे सामने विचाराधीन नहीं है।" 'संसद में कई सांसद private member Bill लाए — लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें floor तक नहीं पहुँचने दिया और मंत्री कहते हैं: कोई प्रस्ताव ही नहीं है।' 'घोषणा की ज़रूरत नहीं — तो CM की घोषणा की ज़रूरत क्यों पड़ी ?' महाराजश्री ने UP CM के उस बयान का तीखा खंडन किया, जिसमें उन्होंने एक सभा में कहा: 'गाय जन्म-जन्मांतर की माता है — इस नाते के लिए घोषणा की क्या ज़रूरत?' उस सभा में आधी जनता भी ताली नहीं बजा रही थी। 'वे जानते थे कि यह खोखला है।' महाराजश्री ने कहा: 'आप मतगणना केंद्र पर बैठे थे। आपको पता था कि जीत गए, लेकिन बाहर नहीं निकले। कोई भी नहीं निकलता। क्यों ? क्योंकि जब तक अधिकारी माइक पर घोषणा नहीं करता — "यह प्रत्याशी विजयी घोषित" — protocol नहीं मिलता। घोषणा होते ही, शपथ से पहले ही, आपका protocol शुरू हो गया था। घोषणा का महात्म्य यही है। वह अनिश्चय समाप्त करती है। थाने का थानेदार आज संशय में है: गौरक्षक कहता है माता है, ट्रांसपोर्टर कहता है पशु है — किसे माने ? राज्य की घोषणा उसे road map देगी। यही हम माँग रहे हैं।' 'महाराष्ट्र CM एकनाथ शिंदे ने गौ माता को राज्य माता घोषित किया — कोई संवैधानिक संकट नहीं आया — योगी क्यों नहीं ?' महाराजश्री ने महाराष्ट्र का निर्णायक उदाहरण रखा: 'एकनाथ शिंदे — एक छोटी पार्टी के नेता, गठबंधन सरकार के मुखिया — ने महाराष्ट्र में गाय को राज्य माता घोषित किया। न कोई कानूनी चुनौती आई, न संवैधानिक संकट, न न्यायालय ने रोका। अगर एक छोटी पार्टी का नेता यह कर सकता है — तो देश के सबसे बड़े राज्य के मुखिया, जो भगवा वस्त्र पहनते हैं, जो गोरक्षपीठ के महंत हैं, जो हिंदू हृदय सम्राट कहलाते हैं — उनके सामने कौन सी बाधा है? हमने सार्वजनिक रूप से बार- बार पूछा: बताइए कौन अड़ा है — मुसलमान ? सपा ? कांग्रेस ? हम उसे ठीक करते हैं। कोई नाम नहीं बताया। लोग अनुमान लगाते हैं कि बूचड़खाने से आने वाला चंदा कारण है। हम यह नहीं कहते — लेकिन जब सच नहीं बताओगे तो अनुमान यही लगेगा।' गंगा राष्ट्र नदी का दृष्टांत — घोषणा से सब कुछ बदल गया महाराजश्री ने अपने स्वयं के आंदोलन का शक्तिशाली दृष्टांत दिया। उन्होंने मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार के खिलाफ गंगा को राष्ट्र नदी घोषित करवाने का आंदोलन चलाया। आंदोलन सफल हुआ। घोषणा से पहले: 29 वर्षों में गंगा कार्य योजना में केवल ₹1,825 करोड़ खर्च हुए। घोषणा के बाद: ₹43,000 करोड़ का budget निर्धारित हुआ — और नमामि गंगे में अब तक ₹22,000 करोड़ खर्च हो चुके हैं। उन्होंने कहा: 'घोषणा से पहले 5 राज्य 5 तरह से गंगा का इलाज करते थे — एक allopathy, एक homeopathy, एक Ayurveda। घोषणा के बाद एक केंद्रीय authority, एक road map, एक विशाल budget। गौ माता के साथ वही परिवर्तन आएगा। स्कूल की पाठ्यपुस्तकें बदलेंगी, थाने को road map मिलेगा, सरकार का रुपया गौ रक्षा पर लगेगा। इसलिए घोषणा मायने रखती है।' उन्होंने यह भी बताया कि यह उनके गुरुजी का ही आदेश था जिस पर राजीव गांधी ने गंगा कार्य योजना और राम जन्मभूमि का ताला खुलवाया था — 'हम कभी किसी एक पार्टी के नहीं रहे।' 'स्कूली पाठ्यपुस्तक: गाय एक पशु है, जिससे दूध और मांस मिलता है — 6-7 साल के बच्चों को यह सिखाया जा रहा है' महाराजश्री ने एक अत्यंत चिंताजनक उदाहरण दिया: एक प्रमुख school chain की कक्षा 2 की पाठ्यपुस्तक में लिखा है — 'गाय एक पशु है। इससे हमें दूध और मांस मिलता है।' 'छह-सात साल के बच्चे को यह सिखाया जा रहा है: जब दूध बंद हो जाए तो मांस खाओ। यही हमारी अगली पीढ़ी को दिया जा रहा है। जिस दिन गाय को राष्ट्र माता घोषित किया जाएगा, यह पाठ्यपुस्तकें बदलनी पड़ेंगी। अकेले इसी एक कारण से घोषणा अनिवार्य है।' 'इस बकरीद मुसलमानों ने गाय नहीं खरीदी — लाखों बचीं — भाजपा ने उन्हें पशु बुद्धि कहा' महाराजश्री ने हमारे समय की एक गहरी विडंबना व्यक्त की। इस बकरीद पर मुस्लिम समाज ने — एक अभूतपूर्व सामूहिक निर्णय में — गाय नहीं खरीदी। कहीं से कोई समाचार नहीं आया कि किसी मुसलमान ने गाय काटी। लाखों गायें बचीं। 'एक सच्चे हिंदू को प्रसन्न होना चाहिए था। शत्रु भी अच्छा काम करे तो उसकी प्रशंसा करने का जिगर रखना चाहिए। सही प्रतिक्रिया होती: बहुत अच्छा किया, इसे स्थायी बनाओ। इसके बजाय उन्हें पशु बुद्धि कहा गया। यह कौन सा तर्क है ? उन्होंने लाखों गौ माताओं को बचाया। हमें इतना नैतिक साहस तो रखना ही चाहिए कि अच्छे काम की तारीफ कर सकें — चाहे वह किसी से भी आए। और इतना साहस भी कि अपने का बुरा काम देखकर कह सकें : यह गलत है।' सामूहिक संकल्प — चक्रधारी मुद्रा महाराजश्री ने उपस्थित जनसमुदाय से सामूहिक घोषणा करवाई: "मैं घोषणा करता/करती हूँ कि गाय मेरी माता है। उन्हें पशु कहने से मुझे पीड़ा होती है। आज से उन सबसे जो गौ माता को चोट पहुँचाते हैं — मेरा संबंध टूटा। आने वाले चुनाव में vote अवश्य दूँगा — लेकिन केवल उस पार्टी या प्रत्याशी को जो माता घोषित करके आए।" तत्पश्चात चक्रधारी मुद्रा में वैदिक संकल्प "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ" का सामूहिक उच्चारण कराया गया। महाराजश्री ने स्मरण दिलाया: 'हमने कांग्रेस के खिलाफ, बसपा के खिलाफ, सपा के खिलाफ आंदोलन किए हैं। इस सरकार को भी जवाबदेह ठहरा रहे हैं। जो घोषणा करे — vote उसी का।' 24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प 3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारंभ हुई गविष्ठि यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी। मीडिया टीम 'परमाराध्य' परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती '१००८' संपर्क सूत्र: +91 98396 42008

Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Jun 4, 2026

छतरपुर : मंत्री के निवास में निकला विशाल सांप, live रेस्क्यू

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Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Jun 4, 2026

आज राजस्थान भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष बड़े चंद्रशेखर आजाद जी, राष्ट्रीय महासचिव एड. रविंद्र भाटी जी सामाजिक न्याय महासम्मेलन राजस्थान के जयपुर में सम्पन्न हुआ विशाल जनसभा को सम्बोधित किया जय भीम ,जय भारत - Chhatarpur Nagar News