हरियाणा की राजनीति व किसान संगठनों में भी इस समय ठीक यही बहस चल रही है। वास्तव में, पंजाब से सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर का पानी न मिल पाना और दूसरी तरफ राजस्थान के साथ हाल ही में हुआ यमुना जल समझौता (MoU) दो अलग-अलग नदियों और कानूनी समझौतों से जुड़े मामले हैं।
1. पंजाब और हरियाणा का विवाद (SYL नहर का मामला):-
मूल समस्या: 1966 में हरियाणा बनने के बाद रावी-ब्यास नदियों के पानी में हरियाणा को 3.5 MAF (मिलियन एकड़ फीट) हिस्सा आवंटित किया गया था। इसके लिए सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर बनाई जानी थी।
ताजा स्थिति: हरियाणा ने अपने हिस्से की 90 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण बहुत पहले पूरा कर लिया था, लेकिन पंजाब ने अपने हिस्से की 121 किलोमीटर नहर का काम रोक रखा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद पंजाब सरकार का रुख यह है कि उसके पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है। इस कारण हरियाणा आज भी पंजाब से अपने हक का पानी नहीं ले पा रहा है।
2. राजस्थान के साथ हुआ नया समझौता