छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में गांधीनगर थाने के ठीक पीछे स्थित घसियापारा मोहल्ले में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। परेशान महिलाओं द्वारा कलेक्टोरेट में शिकायत के बाद आबकारी विभाग और पुलिस ने औपचारिकता निभाते हुए दिखावे की कार्रवाई तो की, लेकिन नतीजे ढाक के तीन पात रहे। आरोप है कि खाकी के कथित संरक्षण में अमृत और उदित जैसे कारोबारी बेखौफ होकर यह अवैध धंधा चला रहे हैं। क्या थाने की चारदीवारी के पीछे हो रहा यह गैरकानूनी खेल सचमुच पुलिस की नजरों से छिपा है, या फिर 'सांठगांठ' के चलते आंखें मूंद ली गई हैं?
जब खाकी नाकाम साबित हुई, तो त्रस्त मोहल्लेवासियों को खुद सड़क पर उतरना पड़ा। स्थानीय निवासी मुकेश तिवारी ने शराब की खेप ले जा रहे एक बाइक सवार को रंगे हाथों धर दबोचा, जिसने पूछताछ में सीधे अमृत का नाम कबूल किया। अब सीधा सवाल प्रशासन और गांधीनगर पुलिस की कार्यशैली पर उठता है। जब जनता को ही तस्कर पकड़ने हैं, तो क्या पुलिस का काम सिर्फ कागजी कार्रवाई और 'संरक्षण' देना रह गया है?
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