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मरीज के मौत के बाद मुजफ्फरपुर के जुरन छपरा स्थित एक निजी अस्पताल में परिजनों ने हंगामा किया! . . समाचार का यह कैप्शन थोड़ा अटपटा जरूर है, आमतौर पर कोई भी न्यूज़ चैनल अस्पताल में हुई मौत के बाद परिजनों को लेकर इसी प्रकार के कैप्शन बनाते हैं। पर यह परिजनों के द्वारा हंगामा होता है या अपने को खोने का दुख, यह तो वही बता सकता है जिसके ऊपर दुख का पहाड़ टूट पड़ा हो। मुजफ्फरपुर के जूरन छपरा स्थित अशोका हॉस्पिटल में आज एक मरीज को भर्ती कराया गया, जनरेटर चालू करने के दौरान लगी चोट के कारण उसके पेट में दर्द था। परिजनों ने निजी अस्पताल से पहले मेडिकल कॉलेज में बच्चे का X-Ray एवं सभी प्रकार का जांच पड़ताल करवाया था। परिजनों की माने तो मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने बताया कि घबराने जैसी कोई बात नहीं, चोट के कारण बस पेट में दर्द है जो की थोड़े ही समय में ठीक हो जाएगा। सरकारी अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद मरीज की मां ने मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल से भी ओपिनियन जानना चाहा। एवं मरीज की मां ने अपने भाई के साथ मुजफ्फरपुर के जूरन छपरा रोड नंबर एक स्थित अशोक अस्पताल में बच्चों को भर्ती कराया। जहां थोड़ी ही देर बाद बच्चों की हालत गंभीर होती चली गई और बच्चे की मौत हो गई, अब परिजनों का कहना है कि मामूली से लगे चोट के कारण हो रहे दर्द का इलाज करने पहुंचे मरीज की मौत कैसे हो सकती है? हालांकि जब आप किसी भी अस्पताल में मरीज को लेकर जाते हैं तो वहां पर दो ही चीज संभव है, या तो मरीज ठीक होकर घर लौटेगा, या यदि स्थिति गंभीर हो तो मरीज की मौत हो सकती है। मगर निजी अस्पतालों ने अपनी विश्वसनीयता इस प्रकार से को दी है कि अब इलाज कराने जाने वाले मरीज के साथ यदि कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो इसके लिए जिम्मेवार अस्पताल को ही माना जाता है। हालांकि इसके लिए भी मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल दोषी हैं, मुजफ्फरपुर के बाहर आप किसी अच्छे अस्पताल में जाएंगे तो वहां पर आपको बेहतरीन तरीके से बातचीत एवं उपचार के साथ-साथ उचित परामर्श भी दिया जाता है जिसमें खास तौर पर अस्पताल प्रबंधन का व्यवहार देखने योग्य होता है। पर मुजफ्फरपुर के ज्यादातर निजी अस्पताल के प्रबंधक एवं स्टाफ मरीज एवं मरीज के परिजनों से इस प्रकार बातचीत करते हैं जैसे कि उनका इलाज कर कर उनके ऊपर वह कोई एहसान लाद रहे हो। मुजफ्फरपुर के ज्यादातर निजी अस्पताल में हाइजीन भी एक बड़ी समस्या है, पर लोग जब पैसा देते हैं तो अच्छे इलाज के साथ-साथ सुविधा और अच्छा व्यवहार तो खोजेंगे ही, हालांकि अस्पताल के साथ सभी लोगों का अपना-अपना अलग-अलग अनुभव होता है। कुछ लोग किसी निजी अस्पताल को बहुत अच्छा बताते हैं क्योंकि उनका मरीज वहां से सकुशल ठीक हो कर लौटकर घर आ जाता है। तो वहीं उसी अस्पताल को लेकर अन्य लोगों की अनुभव जरूरी नहीं है कि अच्छे ही हो क्योंकि कई लोगों के मरीज वापस घर नहीं लौट पाते। Bihar Dastak #AshokaHospital

Bihar, India | Jul 13, 2026