उर्दू के साथ नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा __________________
बिहार में नव सृजित 208 डिग्री कालेजों में उर्दू,फारसी एवं अरबी भाषा का पद सृजित करते हुए उक्त भाषाओं की पढ़ाई सुनिश्चित करने के संबंध में पूर्व विधायक कोचाधामन मुजाहिद आलम ने माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र भेजकर इस संबंध में उचित पहल करने का आग्रह किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव 2025 से पहले बिहार के उन सभी प्रखंडों में जहां पूर्व से डिग्री कालेज नहीं है, डिग्री कालेज खोलने का घोषणा किया था,बाद में बिहार केबिनेट से भी इसकी स्वीकृति प्रदान की गई। जून 2026 से बिहार में नव सृजित 208 डिग्री कालेजों में शैक्षणिक सत्र प्रारम्भ किया गया है। परन्तु उक्त नव सृजित डिग्री कालेजों में उर्दू, फारसी एवं अरबी भाषा का पद सृजित नहीं है जिससे उक्त भाषाओं के अध्यन करने वाले छात्र -छात्राएं अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। जब कि उर्दू भाषा बिहार में हिन्दी भाषा के बाद दूसरी सरकारी भाषा है। बिहार की एक एक बड़ी आबादी उर्दू भाषा में पठन पाठन करते हैं जिसमें मुस्लिम के अतिरिक्त दूसरे धर्म के लोग भी शामिल हैं। जब संविधान लागू हुआ तब से उर्दू भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है यानि कि उर्दू भाषा को भारतीय संविधान से भी मान्यता प्राप्त है। सरकार के इस निर्णय के तेहत किशनगंज जिले के सात प्रखंडों में से चार प्रखंडों में कोचाधामन, पोठिया, दिघलबैंक एवं टेढ़ागाछ में डिग्री कालेज खोलने हेतु भूमि उपलब्ध कराया गया है। आर्थिक संकट से जूझ रही बिहार सरकार नए डिग्री कालेजों के निर्माण के इतर फिलहाल सरकार पुराने+2 माध्यमिक विद्यालयों में जून 2026 से शैक्षणिक सत्र प्रारम्भ किया गया है। पूर्व विधायक कोचाधामन मुजाहिद आलम ने इस संबंध में माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का ध्यान आकृष्ट करते हुए उचित पहल करने का आग्रह किया है।✍️
Jokihat, Araria | Jun 12, 2026