जनपद #अमेठी, ब्लॉक #जामों, ग्राम महराजपुर में 'गायब' सफाई कर्मी! एक महीने से ड्यूटी नदारद
अमेठी में 'गायब' सफाई कर्मी महोदय, क्या आपकी झाड़ू भी 'डिजिटल' हो गई है?
अमेठी। सुना है कि सरकारें स्मार्ट विलेज बनाने का सपना देख रही हैं, लेकिन जामों ब्लॉक के महराजपुर गाँव में तो सफाई व्यवस्था ही 'गायब' हो गई है। यहाँ तैनात सफाई कर्मी श्री अंकुर बरनवाल जी इतने 'व्यस्त' हैं कि पिछले एक महीने से अपनी शक्ल दिखाने की जहमत तक नहीं उठाई। लगता है गाँव की सफाई उनके लिए अब कोई मायने नहीं रखती, या शायद वे किसी 'अदृश्य' मिशन पर निकले हैं।
लगता है ग्राम पंचायत की सफाई व्यवस्था अब झाड़ू से नहीं, शिकायत पत्रों से चलेगी। महराजपुर गांव में तैनात सफाई कर्मचारी के एक माह से लगातार अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया गया है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि नालियां, सार्वजनिक स्थल और विद्यालय परिसर सफाई का इंतजार करते रहे, जबकि जिम्मेदार कर्मचारी कथित रूप से नजर नहीं आए।
गाँव की प्रशासक रानी देवी जी उन्हें याद कर-कर के थक गई हैं, लेकिन अंकुर जी ने अपनी 'अदृश्यता' का व्रत ऐसा धारण किया है कि वे फोन भी रिसीव नहीं करते। अब या तो उनका फोन भी उनकी तरह 'ड्यूटी से अनुपस्थित' है, या फिर वे फोन की घंटी को किसी मधुर संगीत की तरह नजरअंदाज करने में महारत हासिल कर चुके हैं।
ग्राम पंचायत प्रशासक ने जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र भेजकर विभागीय कार्रवाई और दूसरे सफाई कर्मचारी की तैनाती की मांग की है। शिकायत में यह भी आरोप है कि संबंधित कर्मचारी से संपर्क करने पर फोन तक रिसीव नहीं होता।
सफाई कर्मी की इस 'अति-व्यस्तता' के कारण अब महाराजपुर गाँव की नालियाँ, खड़ंजे, पंचायत भवन और विद्यालय परिसर किसी 'कचरा प्रदर्शनी' (Exhibit of Dirt) की तरह चमक रहे हैं। ग्रामीणों की शिकायतें अब उस अंबार का हिस्सा बन गई हैं, जो सफाई कर्मी के न आने से गाँव में जगह-जगह लग चुका है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायत के अनुसार एक माह तक कर्मचारी अनुपस्थित रहे, तो विभाग की निगरानी व्यवस्था भी क्या छुट्टी पर थी? क्या अधिकारियों को इसकी भनक नहीं लगी, या फिर शिकायत आने का इंतजार किया जा रहा था?
यदि शिकायत सही है, तो यह मामला केवल एक कर्मचारी की अनुपस्थिति का नहीं, बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि विभाग कार्रवाई करता है या यह शिकायत भी फाइलों की धूल साफ करती रह जाएगी।
अंत में, हार मानकर प्रशासक रानी देवी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को चिट्ठी भेजी है। गुहार लगाई गई है कि अंकुर जी पर कोई विभागीय कार्रवाई हो या न हो, कम से कम उनका तबादला करके किसी ऐसे व्यक्ति को भेज दें, जिसे झाड़ू पकड़ना आता हो।
खैर, देखना यह है कि प्रशासन अंकुर जी को 'धरातल' पर लाता है, या वे इसी तरह अपनी 'अनुपस्थिति' का रिकॉर्ड बनाते रहेंगे।