नवादा आनंदपुरा: स्कूल के हेडमास्टर पर छात्राओं से छेड़खानी का गंभीर आरोप,बाथरूम में ताक-झांक और अश्लील हरकतों से दहला इलाका
गुरु-शिष्य की मर्यादा तार-तार: कक्षा 6,7 और 8 की बच्चियों ने बयां किया खौफनाक सच,जबरन गोद में बैठाने और गलत नीयत से छूने की शिकायत
आक्रोश की आग में ग्रामीण:आरोपी हेडमास्टर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और बर्खास्तगी की उठी मांग,शिक्षा विभाग में हड़कंप
बिहार के नवादा जिले के आनंदपुरा क्षेत्र स्थित एक विद्यालय से गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध को कलंकित करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है।यहां एक विद्यालय के प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) पर कक्षा 6,7 और 8 की कई छात्राओं ने एक साथ छेड़खानी, अश्लील हरकतें करने और गलत तरीके से छूने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।छात्राओं के इस खुलासे के बाद से न केवल परिजनों में भारी आक्रोश है,बल्कि पूरे इलाके में तनाव और सनसनी फैल गई है।
नवादा के आनंदपुरा स्थित विद्यालय की छात्राओं ने हिम्मत जुटाकर जब हेडमास्टर की काली करतूतों का पर्दाफाश किया,तो हर कोई सन्न रह गया।छात्राओं का आरोप है कि हेडमास्टर लंबे समय से उनके साथ अशोभनीय व्यवहार कर रहा था।बच्चियों ने आपबीती सुनाते हुए आरोप लगाया कि आरोपी शिक्षक न केवल उनसे दोहरे अर्थ वाली अश्लील बातें करता था,बल्कि मौका पाकर उन्हें गलत जगहों पर छूता भी था।
छात्राओं के अनुसार,स्कूल के वॉशरूम/बाथरूम में हेडमास्टर द्वारा ताक-झांक की जाती थी,बाल खींचे जाते थे और केबिन में जबरन गोद में बैठाया जाता था।
छात्राओं की जुबानी,खौफ की कहानी
छात्रा-1 का आरोप:"एक दिन मैं पानी पीने जा रही थी।हेडमास्टर के केबिन के सामने से निकली तो उन्होंने आवाज देकर मुझे भीतर बुला लिया।इसके बाद उन्होंने मुझे जबरन अपनी गोद में बैठा लिया और मेरे सीने पर गलत नीयत से हाथ रख दिया।"
छात्रा-2 का आरोप:"परीक्षा के दिन मैं थोड़ा लेट हो गई थी।जब मैं क्वेश्चन पेपर लेने हेडमास्टर के पास गई,तो उन्होंने मेरा गाल छुआ और आपत्तिजनक तरीके से बातें करने लगे।"
छात्राओं ने बताया कि आरोपी शिक्षक का यह बर्ताव किसी एक बच्ची तक सीमित नहीं था,बल्कि वह 6वीं से 8वीं कक्षा तक की कई बच्चियों को अपना निशाना बना रहा था।डर और झिझक के चलते बच्चियां पहले चुप रहीं,लेकिन जब पानी सिर से ऊपर चला गया तो उन्होंने एकजुट होकर परिजनों और ग्रामीणों को पूरी हकीकत बताई।
घटना की जानकारी मिलते ही विद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में अभिभावक और स्थानीय लोग जुट गए और जमकर हंगामा हुआ। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और शिक्षा विभाग को सूचित किया गया। अधिकारियों का कहना है कि बच्चियों के बयानों की गंभीरता से जांच की जा रही है और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा के जिस मंदिर में बच्चियों को सुरक्षा और आत्मसम्मान मिलना चाहिए था, वहां से इस तरह के आरोप सामने आना समाज और प्रशासनिक निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में पॉक्सो (POCSO) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर पारदर्शी व त्वरित जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और व्यवस्था के प्रति भरोसा कायम रहे।
अपील
"बच्चियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता। ऐसे कृत्यों में लिप्त व्यक्तियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई नज़ीर बननी चाहिए।"
स्कूलों में विशाखा व पोक्सो समिति का सक्रिय संचालन: हर विद्यालय में एक स्वतंत्र, महिला शिक्षकों की अगुवाई वाली शिकायत निवारण समिति अनिवार्य रूप से सक्रिय हो, जहां छात्राएं बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें।
सीसीटीवी निगरानी:विद्यालय परिसरों,गलियारों और सार्वजनिक आवाजाही वाले क्षेत्रों में चालू हालत में सीसीटीवी कैमरे लगे हों,जिनकी नियमित समीक्षा हो।
नियमित संवाद व काउंसिलिंग:शिक्षा विभाग द्वारा महिला परामर्शदाताओं के जरिए हर माह स्कूलों में छात्राओं से गोपनीय संवाद सत्र आयोजित किए जाएं।
माता-पिता व शिक्षकों से आग्रह:बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर नजर रखें और उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि वे किसी भी असहज अनुभव को बिना किसी झिझक के साझा कर सकते हैं।
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