#ऐसे_बनेंगे_क्या_हम_विश्वगुरु?
भरतपुर। डीग जिले की पहाड़ी तहसील के पीपलखेड़ा गांव से प्रशासनिक दावों और स्थानीय विकास की खोखली हकीकत को पूरी तरह उजागर करने वाली शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। गांव में एक बुजुर्ग महिला के निधन के बाद जब परिजन और ग्रामीण उनके अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचे, तो उन्हें कुदरत के कहर के साथ-साथ तंत्र की चरमराती व्यवस्था का सामना करना पड़ा। तेज बारिश के बीच श्मशान घाट पर पक्के शेड की व्यवस्था न होने के कारण परिजनों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी। बारिश से चिता को बचाने के लिए तिरपाल और पन्नी का सहारा लिया गया। बेबस परिजनों और ग्रामीणों ने पानी से भीगती चिता और उठती लपटों के बीच तिरपाल तानकर जैसे-तैसे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। डिजिटल युग और गांव-गांव विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशासन के मुंह पर यह घटना एक करारा तमाचा है। यह बेहद शर्मनाक और दुखद है कि इंसान को जीवनभर की जद्दोजहद के बाद मौत के बाद भी एक सम्मानजनक अंतिम विदाई तक नसीब नहीं हो पा रही है।