TCBT की
पंच महाभूत कृषि
मूल प्राकृतिक खेती है
कैसे....
यह पूरी प्रकृति को पंच महाभूतों ने अपनी मेटर की सूक्ष्म अवस्था (तृण मात्राओं) से बनाया है।
पदार्थ (मेटर) की सूक्ष्म अवस्थाएं है
रूप (एटम)
रंग
गंध
स्वर (स्पंदन/वाइब्रेशन)
स्पर्श
इन्हीं तृणमात्राओं से यह पूरी प्रकृति बनी है
इन्हीं तृणमात्राओं का उपयोग TCBT कृषि में जाती है।
इसलिए TCBT कृषि मूल प्राकृतिक खेती है।
जिस तृणमात्रा से हमारा यह ढांचागत शरीर बना है वे आवेशित कण हैं, परमाणु हैं,
जो कार्बन से युग्मित हैं। C6 H12O6 से ग्लुकोश बनता है और इसी श्रृंखला में सेल्युलोज, हेमी सेल्युलोज और लिग्निन से लकड़ी बनती है और TCBT के वृक्षायुर्वेद आधारित घोल में ऐसे ही परमाणु आवेशित अवस्था में श्रृंखलाबद्ध होते हैं।
इसलिए ये आयन सीधे पौधों द्वारा ग्रहण कर लिए जाते हैं चूंकि ये रसायन वृक्षायुर्वेद से बने हैं, इसलिए TCBT इन्हें जैव रसायन कहता है।
TCBT में संतृप्त और एक्टिवेटेड कार्बन निर्माण प्रक्रिया सिखाई जाती है इसीलिए मिट्टी में 2% कार्बन बढ़ जाता है
पत्तो में भी स्थिर और एक्टिवेटेड कार्बन देना सिखाया जाता है इसीलिए पत्ते बड़े बड़े और हरे कच्च रहते है।
गोबर से निकला हुआ कार्बन गौ-मय द्रव्य रसायन है TCBT इसे संतृप्त कार्बन में बदलकर अर्थात कार्बन के परमाणुओं को दूसरे परमाणुओं से युग्मित करके स्थाई और एक्टिवेटेड कार्बन में बदला जाता है। यह कार्बन मिट्टी में धूप के प्रभाव से नहीं उड़ता।
यह कार्बन पौधों में ठोस तना बनाता है, मिट्टी में प्रभावी ह्यूमस का निर्माण करता है।
आधुनिक विज्ञान खनिज तत्व पूर्ति को न्यूट्रिशन प्रबंधन कहता है। TCBT में यह प्रबंधन रंग, गंध, स्वर और स्पर्श पांच तरह से करने में सक्षम है। यह भूमि तत्व पूर्ति की प्रक्रिया हुई।
इसके अलावा पौधे के अंदर गगन तत्व बने अर्थात रिक्तता आए,
वायु तत्व बने अर्थात हवा की मात्रा पर्याप्त हो,
अग्नि तत्व संतुलित रहे अर्थात पौधे के अंदर 32 अंश डिग्री डेम्प्रेचर तापमान बना रहे,
नीर तत्व अर्थात वापसा की स्थिति और जीवनी शक्ति लगातार सक्रिय रहे इस बात का भी ध्यान रखा जाता है।
पंचमहाभूत कृषि में पौधे में निम्न पंच स्तरीय शरीर संरचना निर्माण होता है।
अन्नमय शरीर (सभी अणुओं का होना)
प्राणमय शरीर (सजीव कोशिका निर्माण)
मनोमय शरीर (कोशिका का मन जागृत होना)
बुद्धिमय शरीर (कोशिका की बुद्धि जागृत होना)
आनंदमय शरीर (कोशिका का अपने अंग में समाविष्ट होना)
TCBT में पौध निर्माण का इतना व्यापक चिंतन है इसलिए फसल / पौधे कभी बीमार नहीं पड़ते हैं और अधिकतम उत्पादन प्राप्त होता है।