मुख्यमंत्री के आश्वासन पर बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, 3 नवंबर को फिर बैठक
- निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले की समीक्षा करेगा एचईआरसी, धारा 108 के तहत कार्रवाई का भरोसा; दो दिन तक 15 जिलों में बिजली संकट से जूझे लोग
सिरसा।
हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के विरोध में चल रही बिजली कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल शुक्रवार शाम दूसरे दिन समाप्त हो गई। पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ कर्मचारी संगठनों की दूसरे दौर की बैठक में मिले आश्वासन के बाद हड़ताल वापस लेने का फैसला किया गया। मुख्यमंत्री ने बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत कार्रवाई का भरोसा देते हुए हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) से निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले की समीक्षा करने को कहा है। इस मामले में अगली बैठक 3 नवंबर को होगी। ऑल हरियाणा पावर वर्कर यूनियन के नेता देवेंद्र हुड्डा ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ सभी मांगों पर बातचीत हुई है। सरकार ने निजी कंपनी को हरियाणा में बिजली वितरण के क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोकने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया है। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार बिजली कर्मचारियों के साथ है। गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का लाइसेंस देने संबंधी एचईआरसी के आदेश के बाद बिजली मंत्री अनिल विज ने भी फैसले का विरोध करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में अपनी बात रखी थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एचईआरसी बिजली अधिनियम के तहत गठित आयोग है और बिजली वितरण के लिए आवेदन करने का अधिकार किसी भी पात्र कंपनी को हो सकता है। सरकार ने बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत आयोग को फैसले की समीक्षा करने के लिए कहा है। कर्मचारियों ने भी हड़ताल खत्म करने पर सहमति जताई है।
25 साल के लाइसेंस के विरोध में उतरे कर्मचारी
विवाद की शुरुआत तब हुई, जब एचईआरसी ने 19 अक्टूबर 2026 को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस दिया। यह लाइसेंस सरकारी बिजली वितरण निगमों के समानांतर काम करने के लिए दिया गया है। कर्मचारी संगठनों को आशंका है कि इससे सरकारी बिजली निगमों के राजस्व पर असर पड़ेगा और कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा खतरे में आ सकती है। इसी फैसले के विरोध में कर्मचारी गुरुवार से हड़ताल पर चले गए थे। हड़ताल का असर प्रदेश के 15 जिलों में देखने को मिला। शुक्रवार को भी कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। हिसार, कुरुक्षेत्र, फरीदाबाद, सोनीपत और गुरुग्राम समेत कई शहरों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली संकट के विरोध में कुछ स्थानों पर लोग सड़कों पर भी उतरे। कुरुक्षेत्र और कैथल बार एसोसिएशन ने वर्क सस्पेंड रखा, जबकि पानीपत थर्मल पावर प्लांट की दो यूनिट बंद होने की सूचना सामने आई।
लाइसेंस रद्द करने के लिए अपनानी होगी कानूनी प्रक्रिया
एचईआरसी बिजली अधिनियम, 2003 के तहत गठित स्वायत्त नियामक संस्था है। इसलिए सरकार आयोग के आदेश को सीधे रद्द नहीं कर सकती। बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत राज्य सरकार जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों पर आयोग को निर्देश दे सकती है, लेकिन इस प्रावधान से लाइसेंस अपने आप रद्द नहीं होता। सरकार आयोग के फैसले को बिजली क्षेत्र के अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में चुनौती देने और उस पर रोक लगाने की मांग करने जैसे कानूनी विकल्प भी अपना सकती है। ऐसे में कर्मचारियों की हड़ताल भले ही समाप्त हो गई है, लेकिन निजी कंपनी के लाइसेंस को लेकर विवाद का अंतिम समाधान अब सरकार की अगली कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
सिरसा में बिजली संकट से लोग बेहाल, इनवर्टर जवाब देने से छाया अंधेरा
- कई इलाकों में अब तक बहाल नहीं हुई आपूर्ति, पेयजल संकट ने भी बढ़ाई परेशानी
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सिरसा के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रहने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक बिजली नहीं आने के कारण घरों में लगे इनवर्टर भी जवाब दे गए, जिससे लोगों को अंधेरे में बैठने को मजबूर होना पड़ा। बिजली संकट का असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ा और कई जगह पानी की समस्या उत्पन्न हो गई। शुक्रवार शाम को प्रदेश स्तर पर हड़ताल समाप्त करने की घोषणा के बावजूद सिरसा के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई थी। इससे लोगों की परेशानी बनी रही। बिजली पर निर्भर घरेलू कामकाज से लेकर पानी की व्यवस्था तक प्रभावित होने के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं उद्योग एवं व्यापार जगत को भी नुकसान हुआ है।
Sirsa, Sirsa | Oct 23, 2026