IGMC में ऑपरेशन के बाद मासूम की हालत बिगड़ी, पिता का आरोप- सर्जरी से पहले किसी बड़ी जटिलता की नहीं दी गई जानकारी, अब 10 लाख से ज्यादा खर्च और 4 लाख का कर्ज
बिलासपुर/मंडी: मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र के सिद्ध कोठी निवासी पवन कुमार अपने मासूम बेटे के इलाज को लेकर पिछले कई महीनों से बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। पवन कुमार का आरोप है कि उनके बेटे का एक टेस्टिकल एब्डॉमिनल स्थिति में था, जिसके लिए IGMC शिमला में ऑपरेशन की सलाह दी गई थी। परिवार के मुताबिक 30 मार्च को ऑपरेशन निर्धारित था और सर्जरी से पहले उन्हें ऐसी किसी बड़ी जटिलता के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी, जिससे बच्चे की जान को इस तरह का खतरा हो सकता है।
परिवार का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान बच्चे की हालत अचानक गंभीर हो गई और इसके बाद लंबे समय तक उसे होश नहीं आया। बच्चे को ICU में वेंटिलेटर पर रखा गया। परिजनों के अनुसार, उन्हें बाद में बताया गया कि बच्चे को हाइपॉक्सिक ब्रेन इंजरी हुई है।
पिता पवन कुमार के मुताबिक उस समय वह दुबई में नौकरी कर रहे थे। बेटे की हालत बिगड़ने की सूचना मिलने के बाद उन्हें नौकरी छोड़कर वापस आना पड़ा। उनका कहना है कि जिस समस्या के लिए बच्चे का ऑपरेशन करवाया गया था, उसके दौरान ऐसी गंभीर स्थिति बनने की जानकारी उन्हें पहले नहीं दी गई थी। उनका आरोप है कि जटिलता सामने आने के बाद ही परिवार को बच्चे की गंभीर स्थिति के बारे में जानकारी मिली।
पिता का कहना है कि करीब पांच महीने से परिवार इस संकट से गुजर रहा है और बच्चा लगातार बिस्तर पर है। परिवार के अनुसार, इलाज पर अब तक 10 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं, जिसमें करीब 4 लाख रुपये उधार लिए गए हैं। पिता का कहना है कि नौकरी छूटने के बाद आय का साधन भी प्रभावित हुआ है और अब परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
पवन कुमार का आरोप है कि बच्चे की वर्तमान हालत बेहद गंभीर है और परिवार को आगे के इलाज को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई अस्पतालों में बच्चे को रखने और आगे इलाज कराने को लेकर भी दिक्कतें सामने आ रही हैं। परिवार ने इलाज के दौरान हुई पूरी घटना, ऑपरेशन से पहले दी गई जानकारी और बच्चे की हालत बिगड़ने के कारणों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
पिता ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा है कि अगर इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और परिवार को न्याय दिलाया जाए। हालांकि, चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है और अस्पताल/चिकित्सकों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
पिता पवन कुमार का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे के इलाज के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया, लेकिन अब नौकरी जाने, इलाज पर 10 लाख से अधिक खर्च होने और करीब 4 लाख रुपये के कर्ज के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन स्थिति में पहुंच गया है।
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Bilaspur Sadar, Bilaspur | Jul 28, 2026