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कालपी: कालपी में 8 दिन बाद भी ज्यादातर केंद्र बंद, बारदाना की कमी से खरीद अटकी, जिला विपणन अधिकारी ने दिया आश्वासन

Kalpi, Jalaun | Apr 8, 2026
कालपी में गेहूं खरीद व्यवस्था पटरी से उतर गई है, क्रय केंद्र स्थापित होने के 8 दिन बाद भी अधिकांश केंद्रों पर खरीद शुरू नहीं हो सकी है, मंडी परिसर स्थित एक केंद्र को छोड़कर अन्य सभी केंद्र बंद हैं, जिससे बुधवार दोपहर 2 बजे किसानों की भीड़ बढ़ गई है और उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, फिलहाल जिला विपणन अधिकारी ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।

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जालौन | महेवा ब्लॉक के अवेदेपुर में आवारा गौवंश का संकट, बंद पड़ी गौशाला फिर बनी चर्चा का विषय

महेवा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत अवेदेपुर में आवारा गौवंश की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
 दहेलखण्ड गांव में आवारा गौवंश का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अवेदेपुर के ग्रामीणों ने सैकड़ों की संख्या में घूम रहे आवारा पशुओं को गांव की बंद पड़ी गौशाला में बंद कर दिया।
 ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार विभागों को भी दी थी, लेकिन दो दिन तक कोई व्यवस्था नहीं की गई।

ग्रामीणों के अनुसार गौशाला में बंद पशुओं के लिए हरे चारे, भूसे और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी।
 दो दिनों तक गौवंश भूख से तड़पता रहा।
 पशुओं की दयनीय हालत देखकर ग्रामीणों का मन पसीज गया और उन्होंने मजबूरी में सभी गौवंश को गौशाला से बाहर छोड़ दिया।

अब यही आवारा गौवंश दोबारा खेतों में पहुंचकर किसानों की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। 
किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवेदेपुर में पहले गौशाला संचालित होती थी, लेकिन पशुओं की संख्या कम होने पर उन्हें दूसरी ग्राम पंचायत की गौशाला में भेज दिया गया और यहां की गौशाला बंद कर दी गई। 
अब जब गांव में फिर बड़ी संख्या में आवारा पशु हैं, तो इस गौशाला को दोबारा शुरू किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि बंद पड़ी गौशाला को तत्काल संचालित किया जाए और आवारा गौवंश को वहां सुरक्षित रखा जाए, ताकि किसानों की फसलें बच सकें और बेजुबान पशुओं को भी भोजन व संरक्षण मिल सके।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार गौशालाओं के संचालन, पशुओं के चारे, पानी और रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन कई स्थानों पर इन व्यवस्थाओं का लाभ जमीन पर दिखाई नहीं देता। 
उनका कहना है कि यदि सरकारी धन का सही उपयोग हो तो न किसानों को परेशानी होगी और न ही गौवंश को भूखा भटकना पड़ेगा।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। यदि प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

 आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए...

क्या यह स्थिति चिंताजनक नहीं है कि एक ओर किसान अपनी मेहनत की फसल बचाने के लिए रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बेजुबान गौवंश भूख और प्यास से भटकने को मजबूर है? आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

सरकार गौशालाओं के संचालन, चारा, पानी, चिकित्सा और रखरखाव के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है। 
यदि इसके बावजूद कहीं गौशालाएं बंद पड़ी हैं, पशु सड़कों और खेतों में घूम रहे हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि व्यवस्था में कमी कहां है। 
यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई भी होनी चाहिए।

गौवंश हमारी संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही किसान देश का अन्नदाता है। 
इसलिए ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिसमें न गौवंश भूखा रहे और न किसानों की फसल बर्बाद हो।
 बंद पड़ी गौशालाओं को दोबारा संचालित किया जाए, चारे-पानी की समुचित व्यवस्था हो और आवारा पशुओं के स्थायी संरक्षण की प्रभावी योजना लागू की जाए।

अब आपकी बारी...

 क्या आपके क्षेत्र में भी आवारा गौवंश की यही समस्या है?
 क्या बंद पड़ी गौशालाओं को फिर से शुरू किया जाना चाहिए?
 क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए?

अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए।
 आपकी आवाज ही बदलाव की शुरुआत बन सकती है।

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जालौन | महेवा ब्लॉक के अवेदेपुर में आवारा गौवंश का संकट, बंद पड़ी गौशाला फिर बनी चर्चा का विषय महेवा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत अवेदेपुर में आवारा गौवंश की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। दहेलखण्ड गांव में आवारा गौवंश का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अवेदेपुर के ग्रामीणों ने सैकड़ों की संख्या में घूम रहे आवारा पशुओं को गांव की बंद पड़ी गौशाला में बंद कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार विभागों को भी दी थी, लेकिन दो दिन तक कोई व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों के अनुसार गौशाला में बंद पशुओं के लिए हरे चारे, भूसे और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी। दो दिनों तक गौवंश भूख से तड़पता रहा। पशुओं की दयनीय हालत देखकर ग्रामीणों का मन पसीज गया और उन्होंने मजबूरी में सभी गौवंश को गौशाला से बाहर छोड़ दिया। अब यही आवारा गौवंश दोबारा खेतों में पहुंचकर किसानों की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवेदेपुर में पहले गौशाला संचालित होती थी, लेकिन पशुओं की संख्या कम होने पर उन्हें दूसरी ग्राम पंचायत की गौशाला में भेज दिया गया और यहां की गौशाला बंद कर दी गई। अब जब गांव में फिर बड़ी संख्या में आवारा पशु हैं, तो इस गौशाला को दोबारा शुरू किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि बंद पड़ी गौशाला को तत्काल संचालित किया जाए और आवारा गौवंश को वहां सुरक्षित रखा जाए, ताकि किसानों की फसलें बच सकें और बेजुबान पशुओं को भी भोजन व संरक्षण मिल सके। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार गौशालाओं के संचालन, पशुओं के चारे, पानी और रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन कई स्थानों पर इन व्यवस्थाओं का लाभ जमीन पर दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि यदि सरकारी धन का सही उपयोग हो तो न किसानों को परेशानी होगी और न ही गौवंश को भूखा भटकना पड़ेगा। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। यदि प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए... क्या यह स्थिति चिंताजनक नहीं है कि एक ओर किसान अपनी मेहनत की फसल बचाने के लिए रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बेजुबान गौवंश भूख और प्यास से भटकने को मजबूर है? आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है? सरकार गौशालाओं के संचालन, चारा, पानी, चिकित्सा और रखरखाव के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है। यदि इसके बावजूद कहीं गौशालाएं बंद पड़ी हैं, पशु सड़कों और खेतों में घूम रहे हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि व्यवस्था में कमी कहां है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई भी होनी चाहिए। गौवंश हमारी संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही किसान देश का अन्नदाता है। इसलिए ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिसमें न गौवंश भूखा रहे और न किसानों की फसल बर्बाद हो। बंद पड़ी गौशालाओं को दोबारा संचालित किया जाए, चारे-पानी की समुचित व्यवस्था हो और आवारा पशुओं के स्थायी संरक्षण की प्रभावी योजना लागू की जाए। अब आपकी बारी... क्या आपके क्षेत्र में भी आवारा गौवंश की यही समस्या है? क्या बंद पड़ी गौशालाओं को फिर से शुरू किया जाना चाहिए? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए। आपकी आवाज ही बदलाव की शुरुआत बन सकती है। #जालौन #कालपी #महेवा #अवेदेपुर #दहेलखंड #आवारा_गौवंश #गौशाला #गौमाता #किसान #किसानों_की_समस्या #फसल_बर्बादी #ग्रामीण_भारत #उत्तरप्रदेश #योगीसरकार #प्रशासन #जवाबदो #गौसंरक्षण #AnimalWelfare #CowShelter #GroundReport #BreakingNews #ViralVideo #PublicIssue #VillageNews #SonuMaharaj #CrimeReporter #Journalism #HindiNews #UPNews #JalaunNews

Kalpi, Jalaun | Jul 29, 2026

किन्नर समुदाय की गद्दी पर घमासान! 
पुरुष की एंट्री से बढ़ा विवाद, पुलिस की कार्रवाई पर भी उठे बड़े सवाल

जालौन नगर में किन्नर समुदाय की गद्दी को लेकर चल रहा विवाद अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
 समुदाय के भीतर चल रहे मतभेद अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुके हैं। 
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और स्थानीय चर्चाओं के बीच कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

विवाद की सबसे बड़ी वजह उस व्यक्ति की एंट्री बताई जा रही है, जिसे किन्नर समुदाय में चेले के रूप में शामिल किए जाने और आगे गद्दी से जोड़ने की चर्चा है। 
इसको लेकर समुदाय के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आने की बात कही जा रही है। 
वहीं यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिस चेले ने वर्षों तक गुरु परंपरा के साथ रहकर अपना जीवन बिताया, उसे अचानक गद्दी की दौड़ से बाहर कर दिया गया। 
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

इसी बीच सभासद विजय वर्मा की भूमिका को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं और आरोप सामने आए हैं।
 हालांकि इन आरोपों पर उनका पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
 दूसरी ओर, मामला तब और सुर्खियों में आ गया जब जालौन नगर में रह रही नेहा किन्नर को पुलिस की मौजूदगी में घर से बाहर निकाले जाने का वीडियो सामने आया। 
इस कार्रवाई के पीछे क्या कानूनी आधार था और किन परिस्थितियों में पुलिस मौके पर पहुंची, इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।

अब पूरे घटनाक्रम को लेकर कई बड़े सवाल उठ रहे हैं—
आखिर किन्नर समुदाय की गद्दी को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हुआ?

क्या गुरु-चेला परंपरा के नियमों का पालन किया गया?

जिस व्यक्ति की एंट्री को लेकर विवाद है, उसका समुदाय से वास्तविक संबंध क्या है?

वर्षों से समुदाय के साथ रहने वाले चेले को किन कारणों से अलग किया गया?

पुलिस की मौजूदगी में हुई कार्रवाई किस आधार पर की गई?

क्या सभी पक्षों की बात सुनने के बाद कार्रवाई हुई या नहीं?

प्रशासन इस पूरे विवाद में क्या भूमिका निभा रहा है?

क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी?

फिलहाल पूरे मामले में कई दावे और आरोप सामने हैं, लेकिन इनकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
 संबंधित पक्षों और पुलिस का विस्तृत बयान आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।

 नोट: यह समाचार सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उपलब्ध दावों के आधार पर तैयार किया गया है।
 आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर समाचार को अपडेट किया जा सकता है।

आपकी इस पूरे मामले पर क्या राय है?
 कमेंट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।

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किन्नर समुदाय की गद्दी पर घमासान! पुरुष की एंट्री से बढ़ा विवाद, पुलिस की कार्रवाई पर भी उठे बड़े सवाल जालौन नगर में किन्नर समुदाय की गद्दी को लेकर चल रहा विवाद अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। समुदाय के भीतर चल रहे मतभेद अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुके हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और स्थानीय चर्चाओं के बीच कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। विवाद की सबसे बड़ी वजह उस व्यक्ति की एंट्री बताई जा रही है, जिसे किन्नर समुदाय में चेले के रूप में शामिल किए जाने और आगे गद्दी से जोड़ने की चर्चा है। इसको लेकर समुदाय के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आने की बात कही जा रही है। वहीं यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिस चेले ने वर्षों तक गुरु परंपरा के साथ रहकर अपना जीवन बिताया, उसे अचानक गद्दी की दौड़ से बाहर कर दिया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। इसी बीच सभासद विजय वर्मा की भूमिका को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं और आरोप सामने आए हैं। हालांकि इन आरोपों पर उनका पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, मामला तब और सुर्खियों में आ गया जब जालौन नगर में रह रही नेहा किन्नर को पुलिस की मौजूदगी में घर से बाहर निकाले जाने का वीडियो सामने आया। इस कार्रवाई के पीछे क्या कानूनी आधार था और किन परिस्थितियों में पुलिस मौके पर पहुंची, इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है। अब पूरे घटनाक्रम को लेकर कई बड़े सवाल उठ रहे हैं— आखिर किन्नर समुदाय की गद्दी को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हुआ? क्या गुरु-चेला परंपरा के नियमों का पालन किया गया? जिस व्यक्ति की एंट्री को लेकर विवाद है, उसका समुदाय से वास्तविक संबंध क्या है? वर्षों से समुदाय के साथ रहने वाले चेले को किन कारणों से अलग किया गया? पुलिस की मौजूदगी में हुई कार्रवाई किस आधार पर की गई? क्या सभी पक्षों की बात सुनने के बाद कार्रवाई हुई या नहीं? प्रशासन इस पूरे विवाद में क्या भूमिका निभा रहा है? क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी? फिलहाल पूरे मामले में कई दावे और आरोप सामने हैं, लेकिन इनकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। संबंधित पक्षों और पुलिस का विस्तृत बयान आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी। नोट: यह समाचार सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उपलब्ध दावों के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर समाचार को अपडेट किया जा सकता है। आपकी इस पूरे मामले पर क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें। #BreakingNews #Jalaun #JalaunNews #Kalpi #KinnarSamaj #Kinnar #GaddiVivad #NehaKinnar #UPPolice #JalaunPolice #ViralVideo #LocalNews #UttarPradesh #CrimeNews #PoliticalNews #PublicVoice #GroundReport #HindiNews #Bundelkhand #TrendingNews #SocialMedia #NewsUpdate #LiveNews #Exclusive #BigBreaking #Justice #Investigation #SonuMaharaj #JalaunUpdates #Viral

Kalpi, Jalaun | Jul 28, 2026

बड़ा सवाल : छिपा जवाब? 
17 जुलाई का आदेश 28 जुलाई को क्यों आया सामने, नगर पालिका उरई जांच पर उठे नए सवाल

उरई नगर पालिका जांच में बड़ा फेरबदल! रिंकू सिंह राही हटे, नई जांच टीम पर उठने लगे सवाल

नगर पालिका परिषद उरई में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। 
जांच समिति में बदलाव से जुड़ा 17 जुलाई 2026 का कार्यालय ज्ञापन अब 28 जुलाई को सार्वजनिक होने के बाद जिले में चर्चाओं का विषय बन गया है। 
खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब नगर पालिका से जुड़े मामले की जांच को लेकर पहले से ही लोगों की नजरें प्रशासन पर टिकी हुई थीं।

रिकॉर्ड के अनुसार, नगर पालिका उरई में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी के आदेश से 18 जून 2026 को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। 
समिति में अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद्र मौर्य अध्यक्ष, तत्कालीन एसडीएम जालौन रिंकू सिंह राही सदस्य तथा अधिशासी अभियंता अमित कुमार सक्सेना सदस्य बनाए गए थे।

बाद में रिंकू सिंह राही के स्थानांतरण के चलते 17 जुलाई को जारी कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से उनकी जगह वर्तमान एसडीएम जालौन राकेश कुमार सोनी को जांच समिति का सदस्य नामित कर दिया गया। 
आदेश में इसे स्थानांतरण के कारण किया गया प्रशासनिक संशोधन बताया गया है।

हालांकि, आदेश सार्वजनिक होने के समय को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि 17 जुलाई को जारी आदेश 28 जुलाई को ही व्यापक रूप से क्यों सामने आया?
 क्या यह केवल दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने में देरी थी, या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण था? 
फिलहाल इन सवालों का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।

इसी बीच यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नगर पालिका परिषद उरई में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर लोगों की अपेक्षाएं पहले से ही बढ़ी हुई थीं।
 ऐसे में जांच समिति में बदलाव और उसके आदेश के देर से चर्चा में आने पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति अपनी रिपोर्ट कब सौंपेगी, शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच किस निष्कर्ष पर पहुंचेगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो क्या कार्रवाई होगी।

बड़ा सवाल: 17 जुलाई का आदेश 28 जुलाई को चर्चा में क्यों आया? 
क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या केवल दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने में देरी? 
इसका उत्तर संबंधित अधिकारी ही स्पष्ट कर सकते हैं।

आपकी क्या राय है? 
क्या इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन को विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए?
 अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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बड़ा सवाल : छिपा जवाब? 17 जुलाई का आदेश 28 जुलाई को क्यों आया सामने, नगर पालिका उरई जांच पर उठे नए सवाल उरई नगर पालिका जांच में बड़ा फेरबदल! रिंकू सिंह राही हटे, नई जांच टीम पर उठने लगे सवाल नगर पालिका परिषद उरई में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। जांच समिति में बदलाव से जुड़ा 17 जुलाई 2026 का कार्यालय ज्ञापन अब 28 जुलाई को सार्वजनिक होने के बाद जिले में चर्चाओं का विषय बन गया है। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब नगर पालिका से जुड़े मामले की जांच को लेकर पहले से ही लोगों की नजरें प्रशासन पर टिकी हुई थीं। रिकॉर्ड के अनुसार, नगर पालिका उरई में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी के आदेश से 18 जून 2026 को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति में अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद्र मौर्य अध्यक्ष, तत्कालीन एसडीएम जालौन रिंकू सिंह राही सदस्य तथा अधिशासी अभियंता अमित कुमार सक्सेना सदस्य बनाए गए थे। बाद में रिंकू सिंह राही के स्थानांतरण के चलते 17 जुलाई को जारी कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से उनकी जगह वर्तमान एसडीएम जालौन राकेश कुमार सोनी को जांच समिति का सदस्य नामित कर दिया गया। आदेश में इसे स्थानांतरण के कारण किया गया प्रशासनिक संशोधन बताया गया है। हालांकि, आदेश सार्वजनिक होने के समय को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि 17 जुलाई को जारी आदेश 28 जुलाई को ही व्यापक रूप से क्यों सामने आया? क्या यह केवल दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने में देरी थी, या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण था? फिलहाल इन सवालों का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। इसी बीच यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नगर पालिका परिषद उरई में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर लोगों की अपेक्षाएं पहले से ही बढ़ी हुई थीं। ऐसे में जांच समिति में बदलाव और उसके आदेश के देर से चर्चा में आने पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति अपनी रिपोर्ट कब सौंपेगी, शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच किस निष्कर्ष पर पहुंचेगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो क्या कार्रवाई होगी। बड़ा सवाल: 17 जुलाई का आदेश 28 जुलाई को चर्चा में क्यों आया? क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या केवल दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने में देरी? इसका उत्तर संबंधित अधिकारी ही स्पष्ट कर सकते हैं। आपकी क्या राय है? क्या इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन को विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। #BreakingNews #Jalaun #Orai #NagarPalikaOrai #JalaunNews #UPNews #Investigation #Inquiry #RinkuSinghRahi #RakeshKumarSoni #RajeshKumarPandey #ADM #Transparency #Accountability #MunicipalCouncil #HindiNews #GroundReport #Exclusive #PublicInterest #Question #NewsAlert #LatestNews #LocalNews #Trending #ViralNews #SonuMaharaj #CrimeReporter #JalaunUpdates #FactCheck #PublicDiscussion

Kalpi, Jalaun | Jul 28, 2026

झटका मशीन बंद करने को कहा तो लाठी-डंडों से पीटा!

 पीड़ित का आरोप— थाना रेढ़र से भी नहीं मिली सुनवाई, SDM से लगाई न्याय की गुहार

जनपद जालौन के थाना रेढ़र क्षेत्र के ग्राम कन्हरपुरा निवासी अरबिन्द्र उर्फ गुड्डू पुत्र सन्तराम ने उपजिलाधिकारी माधौगढ़ को शिकायती प्रार्थना-पत्र देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 
पीड़ित का कहना है कि वह 28 जुलाई 2026 की सुबह लगभग 10:30 बजे अपने खेत की जुताई कराने ट्रैक्टर लेकर खेत पर गया था।
 उसी दौरान गांव के सुरेश, संदीप और प्रदीप कथित रूप से खेत के पास झटका (करंट) मशीन चला रहे थे।

पीड़ित का आरोप है कि उसने केवल इतना अनुरोध किया कि झटका मशीन बंद कर दी जाए, ताकि किसी व्यक्ति या पशु के साथ करंट लगने जैसी दुर्घटना न हो।
 आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर तीनों लोगों ने एकजुट होकर उसके साथ लाठी-डंडों से मारपीट कर दी, जिससे उसकी छाती सहित शरीर पर गंभीर चोटें आईं।

प्रार्थना-पत्र के अनुसार, शोर सुनकर जब उसकी पत्नी और पुत्री मौके पर पहुंचीं तो उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया तथा गाली-गलौज करते हुए पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि उसके खेत के चारों ओर लगे कटिया तारों के बीच से झटका मशीन के तार डाले गए हैं, जिससे पूरे तारों में करंट फैल जाता है। 
उसका कहना है कि इससे कभी भी किसी व्यक्ति या पशु की जान जा सकती है और इसी खतरे को देखते हुए उसने मशीन बंद करने की बात कही थी।

सबसे गंभीर आरोप थाना रेढ़र पुलिस पर लगाए गए हैं। 
पीड़ित के अनुसार, घटना के बाद वह लिखित शिकायत लेकर थाना पहुंचा, लेकिन वहां मौजूद हल्का इंचार्ज ने उसकी बात सुनने के बजाय डांटते हुए पहले इलाज कराने की बात कही।
 आरोप है कि न तो उसका मेडिकल कराया गया, न कोई कानूनी कार्रवाई की गई और उसे परिवार सहित थाना परिसर से बाहर कर दिया गया।

अब पीड़ित ने उपजिलाधिकारी माधौगढ़ से मामले की निष्पक्ष जांच, तत्काल मेडिकल, आरोपियों के विरुद्ध मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी सहित अन्य लागू धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने, झटका मशीन और करंट वाले तारों की जांच कर हटवाने तथा थाना स्तर पर हुई कथित लापरवाही की भी जांच कराने की मांग की है। 
साथ ही अपने परिवार की सुरक्षा की भी गुहार लगाई है।

नोट: यह समाचार पीड़ित द्वारा उपजिलाधिकारी को दिए गए शिकायती प्रार्थना-पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
 संबंधित पक्ष तथा पुलिस का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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झटका मशीन बंद करने को कहा तो लाठी-डंडों से पीटा! पीड़ित का आरोप— थाना रेढ़र से भी नहीं मिली सुनवाई, SDM से लगाई न्याय की गुहार जनपद जालौन के थाना रेढ़र क्षेत्र के ग्राम कन्हरपुरा निवासी अरबिन्द्र उर्फ गुड्डू पुत्र सन्तराम ने उपजिलाधिकारी माधौगढ़ को शिकायती प्रार्थना-पत्र देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि वह 28 जुलाई 2026 की सुबह लगभग 10:30 बजे अपने खेत की जुताई कराने ट्रैक्टर लेकर खेत पर गया था। उसी दौरान गांव के सुरेश, संदीप और प्रदीप कथित रूप से खेत के पास झटका (करंट) मशीन चला रहे थे। पीड़ित का आरोप है कि उसने केवल इतना अनुरोध किया कि झटका मशीन बंद कर दी जाए, ताकि किसी व्यक्ति या पशु के साथ करंट लगने जैसी दुर्घटना न हो। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर तीनों लोगों ने एकजुट होकर उसके साथ लाठी-डंडों से मारपीट कर दी, जिससे उसकी छाती सहित शरीर पर गंभीर चोटें आईं। प्रार्थना-पत्र के अनुसार, शोर सुनकर जब उसकी पत्नी और पुत्री मौके पर पहुंचीं तो उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया तथा गाली-गलौज करते हुए पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि उसके खेत के चारों ओर लगे कटिया तारों के बीच से झटका मशीन के तार डाले गए हैं, जिससे पूरे तारों में करंट फैल जाता है। उसका कहना है कि इससे कभी भी किसी व्यक्ति या पशु की जान जा सकती है और इसी खतरे को देखते हुए उसने मशीन बंद करने की बात कही थी। सबसे गंभीर आरोप थाना रेढ़र पुलिस पर लगाए गए हैं। पीड़ित के अनुसार, घटना के बाद वह लिखित शिकायत लेकर थाना पहुंचा, लेकिन वहां मौजूद हल्का इंचार्ज ने उसकी बात सुनने के बजाय डांटते हुए पहले इलाज कराने की बात कही। आरोप है कि न तो उसका मेडिकल कराया गया, न कोई कानूनी कार्रवाई की गई और उसे परिवार सहित थाना परिसर से बाहर कर दिया गया। अब पीड़ित ने उपजिलाधिकारी माधौगढ़ से मामले की निष्पक्ष जांच, तत्काल मेडिकल, आरोपियों के विरुद्ध मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी सहित अन्य लागू धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने, झटका मशीन और करंट वाले तारों की जांच कर हटवाने तथा थाना स्तर पर हुई कथित लापरवाही की भी जांच कराने की मांग की है। साथ ही अपने परिवार की सुरक्षा की भी गुहार लगाई है। नोट: यह समाचार पीड़ित द्वारा उपजिलाधिकारी को दिए गए शिकायती प्रार्थना-पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित पक्ष तथा पुलिस का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। #BreakingJalaun #Jalaun #Madhogarh #Rendhar #Kanharpura #UPNews #CrimeNews #GroundReport #Justice #SDM #Police #FIR #Assault #ElectricShock #ViralNews #HindiNews #JalaunNews #Bundelkhand #UttarPradesh #PublicIssue #LawAndOrder #Journalism #LatestNews #Trending #HighAlert

Kalpi, Jalaun | Jul 28, 2026

गौशाला में ताले, खेतों में आवारा गौवंश! रात-रात भर जाग रहे किसान, प्रशासन पर फूटा गुस्सा

गौशाला होने के बावजूद खेतों में घूम रही गायें, आखिर जिम्मेदार कौन?

विकास खंड महेवा की ग्राम पंचायत दहेलखण्ड में आवारा गौवंश किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं। 
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में गौशाला होने के बावजूद दर्जनों गौवंश खुलेआम खेतों में घूम रहे हैं और किसानों की खून-पसीने की मेहनत कुछ ही मिनटों में बर्बाद कर रहे हैं।

बरसात के इस मौसम में किसान दिनभर मेहनत करने के बाद रातभर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। 
उनका कहना है कि यदि थोड़ी देर भी नींद आ जाए तो पूरी फसल आवारा गौवंश चट कर जाते हैं।
 दूसरी ओर बारिश के बीच खेतों में जहरीले सांप-बिच्छुओं का खतरा भी बना रहता है। 
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी किसान के साथ कोई अनहोनी हो जाए तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार उपजिलाधिकारी कालपी और खंड विकास अधिकारी महेवा से शिकायत की।
 उनका दावा है कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। 
इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

अब गांव के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर तत्काल आवारा गौवंश को गौशाला में पहुंचाने और किसानों को राहत दिलाने की मांग की है।

जनता पूछ रही है...

- जब गांव में गौशाला है तो आवारा गौवंश सड़कों और खेतों में क्यों?
- जिलाधिकारी के निर्देशों का पालन आखिर क्यों नहीं हुआ?
- किसानों को अपनी ही फसल बचाने के लिए रातभर पहरा क्यों देना पड़ रहा है?
- क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
- अगर सांप के काटने से किसी किसान की मौत हो जाए तो जिम्मेदार कौन?
- आखिर किसानों की मेहनत की रक्षा कब होगी?

नोट: यह खबर वायरल वीडियो और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार की गई है। 
संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

क्या आपके गांव में भी आवारा गौवंश की यही समस्या है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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गौशाला में ताले, खेतों में आवारा गौवंश! रात-रात भर जाग रहे किसान, प्रशासन पर फूटा गुस्सा गौशाला होने के बावजूद खेतों में घूम रही गायें, आखिर जिम्मेदार कौन? विकास खंड महेवा की ग्राम पंचायत दहेलखण्ड में आवारा गौवंश किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में गौशाला होने के बावजूद दर्जनों गौवंश खुलेआम खेतों में घूम रहे हैं और किसानों की खून-पसीने की मेहनत कुछ ही मिनटों में बर्बाद कर रहे हैं। बरसात के इस मौसम में किसान दिनभर मेहनत करने के बाद रातभर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि यदि थोड़ी देर भी नींद आ जाए तो पूरी फसल आवारा गौवंश चट कर जाते हैं। दूसरी ओर बारिश के बीच खेतों में जहरीले सांप-बिच्छुओं का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी किसान के साथ कोई अनहोनी हो जाए तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार उपजिलाधिकारी कालपी और खंड विकास अधिकारी महेवा से शिकायत की। उनका दावा है कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। अब गांव के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर तत्काल आवारा गौवंश को गौशाला में पहुंचाने और किसानों को राहत दिलाने की मांग की है। जनता पूछ रही है... - जब गांव में गौशाला है तो आवारा गौवंश सड़कों और खेतों में क्यों? - जिलाधिकारी के निर्देशों का पालन आखिर क्यों नहीं हुआ? - किसानों को अपनी ही फसल बचाने के लिए रातभर पहरा क्यों देना पड़ रहा है? - क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? - अगर सांप के काटने से किसी किसान की मौत हो जाए तो जिम्मेदार कौन? - आखिर किसानों की मेहनत की रक्षा कब होगी? नोट: यह खबर वायरल वीडियो और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। क्या आपके गांव में भी आवारा गौवंश की यही समस्या है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें। #ब्रेकिंग_जालौन #कालपी #महेवा #दहेलखण्ड #आवारा_गौवंश #गौशाला #किसान_परेशान #फसल_बर्बाद #रातभर_पहरा #योगी_सरकार #CMYogi #DMJalaun #SDMKalpi #BDOMahewa #जालौन_न्यूज #कालपी_न्यूज #UPNews #BreakingNews #GroundReport #Farmer #FarmerLife #SaveFarmers #CowShelter #RuralNews #ViralVideo #PublicIssue #JusticeForFarmers #किसान_की_पुकार #गांव_की_आवाज #उत्तरप्रदेश

Kalpi, Jalaun | Jul 28, 2026