लुठियाग से IIT रोपड़ तक संजीत की वैज्ञानिक उड़ान
Experimental Nuclear Physics में शोध के लिए मिली Ph.D., पर्यावरणीय रेडियोधर्मिता और विकिरण जोखिम पर किया महत्वपूर्ण अध्ययन
रुद्रप्रयाग। जिले के छोटे से पहाड़ी गांव लुठियाग से निकलकर संजीत सिंह कैंतुरा ने वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। संजीत को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ (IIT Ropar) के 15वें दीक्षांत समारोह में भौतिकी विषय में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने IIT रोपड़ के भौतिकी विभाग में Experimental Nuclear Physics के क्षेत्र में अपना शोध कार्य पूरा किया है।
संजीत का शोध न्यूक्लियर फिजिक्स के साथ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित रहा। उन्होंने पर्यावरणीय रेडियोधर्मिता, विकिरण की पहचान, अत्याधुनिक न्यूक्लियर इंस्ट्रूमेंटेशन तथा रेडियोलॉजिकल स्वास्थ्य जोखिमों के आकलन से जुड़े विषयों पर अध्ययन किया।
उनके शोध का प्रमुख केंद्र मिट्टी में प्राकृतिक रूप से मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों की मात्रा और उनके वितरण को समझना रहा। अध्ययन के दौरान अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और भूमि उपयोग के कारण प्राकृतिक रेडियोधर्मी तत्वों की मौजूदगी में होने वाले बदलावों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया। साथ ही इनसे उत्पन्न होने वाले संभावित विकिरण जोखिम का भी आकलन किया गया।
संजीत के शोध की खास बात यह है कि इसका संबंध केवल प्रयोगशाला और वैज्ञानिक अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। प्राकृतिक रेडियोधर्मिता के स्रोतों की पहचान, उनकी मात्रा का आकलन और उनसे जुड़े संभावित जोखिमों को समझना भविष्य में पर्यावरणीय निगरानी और रेडियोलॉजिकल सुरक्षा के लिए उपयोगी हो सकता है।
प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुए शोध
संजीत के शोध-पत्र कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें Scientific Reports, Nuclear Engineering and Technology, Environmental Monitoring and Assessment, Journal of Radioanalytical and Nuclear Chemistry, Nuclear Instruments and Methods in Physics Research Section A, Applied Radiation and Isotopes तथा The European Physical Journal Special Topics शामिल हैं।
उन्होंने अपने शोध को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलनों में भी प्रस्तुत किया। इनमें DAE Symposium on Nuclear Physics, Asian and Oceanic Congress for Radiation Protection (AOCRP6), International Conference on Applied Nuclear Physics (ANP) और Radiation Awareness and Detection in Natural Environment (RADNET) प्रमुख हैं।
ग्रीस की Aristotle University of Thessaloniki में आयोजित International Conference on Applied Nuclear Physics में भी संजीत ने अपना शोध प्रस्तुत किया। वहीं RADNET सम्मेलन में उन्हें Oral Presentation Category में Best Presentation Award से सम्मानित किया गया।
GATE और CSIR-NET में भी हासिल की सफलता
संजीत ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने GATE-2017 में Physics विषय में सफलता हासिल की। इसके अलावा उन्होंने CSIR-NET 2017 को दो बार क्वालीफाई किया। जून 2017 की परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 69, जबकि दिसंबर 2017 में ऑल इंडिया रैंक 41 हासिल की। उच्च शिक्षा के दौरान उन्हें संस्थागत फेलोशिप भी प्राप्त हुई।
पहाड़ के युवाओं के लिए प्रेरणा
लुठियाग जैसे छोटे पहाड़ी गांव से निकलकर देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान IIT रोपड़ तक पहुंचना और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में Ph.D. हासिल करना संजीत सिंह कैंतुरा की मेहनत, लगन और वैज्ञानिक सोच का परिणाम है। उनकी उपलब्धि से उनके परिवार और गांव के साथ ही रुद्रप्रयाग और उत्तराखंड का नाम भी गौरवान्वित हुआ है।
संजीत की सफलता यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण परिवेश से निकलकर भी दृढ़ संकल्प, निरंतर मेहनत और शिक्षा के बल पर युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। उनकी उपलब्धि को स्थानीय लोगों और शुभचिंतकों ने प्रेरणादायी बताते हुए संजीत के उज्ज्वल वैज्ञानिक भविष्य की कामना की है।