भिवानी में रूढिय़ों को तोड़ बेटी के जन्मदिन पर हुआ कुआं पूजन
हरियाणा महिला आयोग की उपाध्यक्ष मीना परमार ने दिलाया पर्यावरण और बेटी संरक्षण का संकल्प
बेटियों को दें संस्कार और संस्कृति, स्वच्छता को बनाएं जीवनशैली : मीना परमार
भिवानी, 21 सितंबर : समाज में बेटा-बेटी के बीच के फर्क को मिटाने और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने की दिशा में भिवानी में एक प्रेरक पहल देखने को मिली। स्थानीय -----निवासी कमल मेघवाल और उनकी धर्मपत्नी कुसुमलता ने लाडली के जन्म को ऐतिहासिक बनाते हुए कुआं पूजन का आयोजन किया। पारंपरिक रूप से केवल बेटों के जन्म पर निभाई जाने वाली इस रस्म को बेटी के लिए आयोजित कर परिवार ने पूरे समाज को समानता और प्रगतिशीलता का स्पष्ट संदेश दिया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणा महिला आयोग की उपाध्यक्ष मीना परमार ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाए और ढोल-नगाड़ों के साथ उत्साहपूर्वक कुआं पूजन की रस्म पूरी की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में परिवारजन और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
हरियाणा महिला आयोग की उपाध्यक्ष मीना परमार ने परिवार की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज की बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। जब हम बेटी के जन्म और उसके जन्मदिन को उत्सव के रूप में मनाते हैं, तो यह समाज की संकीर्ण मानसिकता पर सीधा प्रहार करता है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के साथ-साथ जल एवं पर्यावरण संरक्षण का भी संकल्प दिलाया।
मीना परमार ने कहा कि हमारी संस्कृति और संस्कार ही हमारे समाज की असली नींव हैं। बेटियों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार देना प्रत्येक माता-पिता का दायित्व है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि परिवार और समाज के स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता को अपनी प्राथमिक दिनचर्या में शामिल करें। जब एक महिला जागरूक और स्वच्छ वातावरण का निर्माण करती है, तो पूरा परिवार स्वस्थ और सशक्त बनता है।
कार्यक्रम के दौरान श्यामलाल मेघवाल और पर्यावरण प्रहरी विजय सिंहमार ने कहा कि यह आयोजन समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है। प्राचीन काल से चली आ रही रूढि़वादी परंपराओं को पीछे छोडक़र बेटियों को बराबर का हक और सम्मान देना ही सभ्य समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कुआं पूजन जैसी सांस्कृतिक परंपराएं हमें जल स्रोतों के महत्व की याद दिलाती हैं। हमें अपनी बेटियों को शिक्षित करने के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण का संकल्प भी लेना चाहिए, ताकि आने वाली पीढिय़ों को सुरक्षित और हरा-भरा भविष्य मिल सके। मेघवाल परिवार ने बेटी चारु के जन्मोत्सव पर यह आयोजन कर यह सिद्ध कर दिया है कि बेटियां ही परिवार और समाज का गौरव हैं।
इस अवसर पर बद्रीप्रसाद, रिंकू ख्यालीराम, नीरज वर्मा, संजय और कुलदीप सहित कई सामाजिक लोगों ने बेटी चारु को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। वहीं महिला शक्ति की ओर से सुशीला, चमेली, फूलपति, पूजा, केला, इंद्रा, सुमन, खुशबू, प्रेम, परमेश्री, रोशनी, गुड्डी, रानी, कृष्णा, संगीता, गंगा, रज्जो और राधिका ने मंगल गान गाकर उत्सव की शोभा बढ़ाई और समाज में बेटियों के प्रति सम्मान बढ़ाने वाली इस पहल का स्वागत किया।