अमित पोद्दार /कुशेश्वरस्थान पूर्वी सावन माह भगवान शिव की आराधना का पवित्र समय माना जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को महादेव ने अपने कंठ में धारण कर ‘नीलकंठ’ बने। इसी के बाद से सावन में जलाभिषेक की परंपरा शुरू हुई, जिससे शिव को शीतलता प्रदान की जाती है। प