कोयले की 'काली कोख' में दफन होतीं गरीब मजदूरों की सांसें: बड़कागांव से लेकर रामगढ़ तक मौत का वही पुराना पैटर्न
बादम हादसे के बाद बिना पोस्टमार्टम शव जलाने की तै
यारी; आखिर क्यों बार-बार साक्ष्य मिटाकर 'लाल' हो रही है माफियाओं की जेब और प्रशासन ने फेर रखी है आंख?
हजारीबाग कोयलांचल
यह हजारीबाग और आसपास के कोयलांचल की वह कड़वी हकीकत है, जहां जमीन के नीचे छिपे काले सोने को निकालने के लिए हर दिन गरीब मजदूर अपनी जान की बाजी लगाते हैं। बड़कागांव थाना क्षेत्र के बादम कोल खनन परियोजना के समीप राउतपाड़ा में हुआ ताजा हादसा कोई पहला या आखिरी वाकया नहीं है। यह एक ऐसा खूनी खेल है जो पिछले कई सालों से इस पूरे इलाके की पहचान बन चुका है। लेकिन इस बार का मंजर और इसके पीछे की कहानी पहले से कहीं ज्यादा चौंकाने वाली और डरावनी है।
साक्ष्य मिटाने का खेल: अपनों की मजबूरी या माफिया का दबाव?
बादम के राउतपाड़ा में जब अवैध खदान की चाल धंसी, तो मलबे के नीचे सचिन साव नामक