युवा नेता भार्तिहरि दुबे ने गोरखपुर जर्नलिस्ट्स क्लब में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि देश की आबादी में युवाओं की बड़ी हिस्सेदारी है और वे देश के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्र जीवन से ही युवाओं में सामाजिक और राजनीतिक समझ विकसित होती है, इसलिए छात्र और युवा हितों को राजनीति के केंद्र में रखा जाना चाहिए। आज बड़ी संख्या में युवा उच्च शिक्षा के बाद रोजगार की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता,समय पर भर्ती,परिणाम और नियुक्ति जैसी कई गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं।विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के सामने फीस,छात्रवृत्ति, छात्रावास,पुस्तकालय,डिजिटल सुविधाओं और अन्य बुनियादी संसाधनों से जुड़े सवाल लगातार सामने आते हैं। युवा नेता ने स्पष्ट किया कि छात्र-हित की राजनीति का दायरा केवल छात्रसंघ चुनाव तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य छात्रों को बेहतर शिक्षा,रोजगार,कौशल विकास के अवसर और समाज में सम्मानजनक भागीदारी दिलाना है। राजनीति में युवाओं की भागीदारी केवल भीड़ जुटाने या प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी उचित स्थान मिलना चाहिए।
युवाओं को जाति,धर्म या केवल राजनीतिक नारों के आधार पर नहीं, बल्कि शिक्षा,रोजगार,विकास, सामाजिक न्याय,पारदर्शिता और जनहित जैसे मुद्दों पर सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। प्रेस वार्ता के माध्यम से भार्तिहरि दुबे ने मांग की है कि सरकार और राजनीतिक दल युवाओं तथा छात्रों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट कार्ययोजना सामने रखें। उन्होंने विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने,समय पर छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने, प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने और रिक्त पदों पर समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया पूरी करने पर विशेष ध्यान देने की अपील की है
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