बिलासपुर: नीरज का खुलासा—मेरे ऊपर दो बार चढ़ाई गई गाड़ी! 23 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं, फोरेंसिक रिपोर्ट पर सवाल; आखिर चुप क्यों हैं SP अभिषेक धीमान? क्या जनता को सच जानने का हक नहीं?
UT HIMACHAL | Unique Today News | विशेष रिपोर्ट
बिलासपुर/घुमारवीं, 20 अक्टूबर 2026। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में 27 सितंबर की रात गंभीर रूप से घायल मिले 25 वर्षीय नीरज कुमार के मामले में अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। UT HIMACHAL को मिले वीडियो में नीरज खुद अपनी आपबीती बताते हुए कह रहा है कि उसके ऊपर एक बार नहीं, बल्कि दो बार गाड़ी चढ़ाई गई थी।
सबसे गंभीर बात यह है कि नीरज के परिजनों के अनुसार, वह घटना के संबंध में पुलिस को पहले ही अपना बयान दे चुका है। इसके बावजूद परिवार का कहना है कि मामला फोरेंसिक रिपोर्ट के इंतजार में अटका हुआ है और अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
घटना को आज 23 दिन बीत चुके हैं। नीरज AIIMS बिलासपुर में गंभीर चोटों से जूझ रहा है। परिवार के अनुसार, उसकी एक आंख की रोशनी लगभग खत्म हो चुकी है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान से है कि आखिर इतने गंभीर मामले में जांच की स्थिति को लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही?
क्या जनता को यह जानने का अधिकार नहीं कि आखिर पुलिस की जांच कहां तक पहुंची है?
नीरज ने बताया—मेरे ऊपर दो बार चढ़ाई गई गाड़ी!
UT HIMACHAL के पास मौजूद वीडियो में नीरज अपने साथ हुई घटना के बारे में बताते हुए कह रहा है कि उसके ऊपर दो बार गाड़ी चढ़ाई गई थी।
नीरज के पिता देवराज शुरुआत से ही इस घटना को सामान्य सड़क दुर्घटना मानने से इनकार करते रहे हैं। उनका आरोप है कि उनके बेटे के साथ जानबूझकर वारदात को अंजाम दिया गया।
अब नीरज का वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जब घायल युवक स्वयं अपने साथ हुई घटना बता रहा है, तो पुलिस की जांच आखिर किस स्तर तक पहुंची है?
परिजनों का दावा है कि नीरज पहले ही पुलिस को बयान दे चुका है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि पुलिस ने उसके बयान के आधार पर अब तक क्या कार्रवाई की है।
फोरेंसिक रिपोर्ट पर क्यों अटका मामला? क्या रिपोर्ट आ चुकी है या अभी तक इंतजार जारी है?
इस मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
घटना 27 सितंबर को हुई थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पुलिस ने संदिग्ध वाहन कब्जे में लिया था और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए थे।
आज घटना को 23 दिन हो चुके हैं, लेकिन परिवार के अनुसार, मामला अभी भी फोरेंसिक रिपोर्ट के इंतजार में अटका हुआ है।
आखिर फोरेंसिक रिपोर्ट आने में इतना समय क्यों लग रहा है?
क्या पुलिस ने समय पर साक्ष्य प्रयोगशाला भेजे थे?
क्या संबंधित प्रयोगशाला से रिपोर्ट जल्द उपलब्ध करवाने के लिए संपर्क किया गया?
क्या रिपोर्ट अभी तक लंबित है या पुलिस को प्राप्त हो चुकी है?
कहीं ऐसा तो नहीं कि फोरेंसिक रिपोर्ट आ चुकी हो, लेकिन उसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया हो?
लेकिन इतने गंभीर मामले में पुलिस को कम से कम यह तो स्पष्ट करना चाहिए कि फोरेंसिक जांच की वर्तमान स्थिति क्या है और आगे की कार्रवाई किस चरण में है।
आखिर चुप क्यों हैं SP अभिषेक धीमान? जनता को जानकारी क्यों नहीं दी जा रही?
बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान (IPS) के नेतृत्व में जिले में अपराध और नशे के खिलाफ विभिन्न कार्रवाइयां सामने आती रही हैं।
पुलिस की कार्रवाई के संबंध में समय-समय पर जानकारी भी साझा की जाती है।
लेकिन नीरज जैसे गंभीर मामले में सवाल यह है कि पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान की ओर से जांच की प्रगति पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं आ रही?
क्या पुलिस के पास कोई ऐसी जानकारी है, जिसे जांच प्रभावित होने के कारण फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया जा सकता?
क्या जांच में कोई तकनीकी या कानूनी बाधा है?
या फिर फोरेंसिक रिपोर्ट के कारण आगे की कार्रवाई रुकी हुई है?
यदि इतने गंभीर मामले में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जांच की स्थिति पर कुछ नहीं बताएंगे, तो आम जनता को कैसे पता चलेगा कि पुलिस क्या कर रही है?
पुलिस से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह जांच से जुड़े सभी गोपनीय साक्ष्य सार्वजनिक कर दे। लेकिन जांच किस स्तर तक पहुंची है, फोरेंसिक रिपोर्ट की स्थिति क्या है और मामले में अब तक क्या कानूनी कार्रवाई हुई है, इस संबंध में उचित जानकारी देना जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
जब सवालों के जवाब नहीं मिलते, तो लोगों के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।
ऐसे में क्या पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह सामने आकर स्थिति स्पष्ट करे और अनावश्यक अटकलों पर विराम लगाए?
यहां यह भी स्पष्ट है कि किसी अधिकारी पर जांच प्रभावित करने या साक्ष्य छिपाने का कोई प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है। सवाल जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर हैं।
एक आंख की रोशनी लगभग खत्म, आखिर कब मिलेगा नीरज को न्याय?
नीरज के परिजनों के अनुसार, घटना में उसे बेहद गंभीर चोटें आई हैं और उसकी एक आंख की रोशनी लगभग खत्म हो चुकी है।
उसका उपचार AIIMS बिलासपुर में चल रहा है।
एक 25 वर्षीय युवक अस्पताल में अपनी जिंदगी और भविष्य के लिए संघर्ष कर रहा है। उसके पिता न्याय की मांग कर रहे हैं।
परिवार का कहना है कि नीरज ने पुलिस को घटना के बारे में बता दिया है, लेकिन अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
क्या ऐसे मामले में जांच की प्रगति पर स्पष्ट जानकारी देना जरूरी नहीं है?
आखिर परिवार को कब तक इंतजार करना पड़ेगा?
27 सितंबर की रात क्या हुआ था?
नीरज के पिता देवराज के अनुसार, 27 सितंबर 2026 की रात करीब 9:40 बजे उनका बेटा निहारी से मोटरसाइकिल पर डोहुरू स्थित अपने घर लौट रहा था।
इसी दौरान दधोल कलां स्थित पशु औषधालय के पास वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
परिवार का आरोप है कि HP-24-D-7026 नंबर की गाड़ी से नीरज को टक्कर मारी गई और उसके ऊपर जानबूझकर वाहन चढ़ाया गया।
घटना के बाद नीरज को पहले घुमारवीं अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए AIIMS बिलासपुर रेफर कर दिया गया।
परिजनों के अनुसार, पुलिस थाना भराड़ी में 28 सितंबर को FIR नंबर 120 दर्ज की गई थी।
समझौते के दबाव और धमकियों के आरोपों की जांच कहां तक पहुंची?
नीरज के पिता देवराज पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि उन्हें फोन पर धमकियां दी गईं और समझौते के लिए दबाव बनाया गया।
परिवार ने इन आरोपों की जांच की मांग भी उठाई थी।
ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि पुलिस ने इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई की है।
क्या संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की गई?
क्या कथित धमकियों के संबंध में कोई साक्ष्य जुटाए गए?
इन सवालों पर भी पुलिस की ओर से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
UT HIMACHAL वीडियो को क्यों कर रहा है ब्लर?
UT HIMACHAL के पास नीरज का वीडियो मौजूद है, जिसमें वह अपने साथ हुई घटना के बारे में बता रहा है।
वीडियो में नीरज की शारीरिक स्थिति से जुड़े दृश्य बेहद भयावह और विचलित करने वाले हैं।
इसी कारण UT HIMACHAL ने वीडियो को ब्लर करके दिखाने का निर्णय लिया है।
हमारा उद्देश्य किसी घायल युवक की पीड़ा को सनसनी बनाना नहीं, बल्कि उसकी आवाज को जिम्मेदारी के साथ जनता और प्रशासन तक पहुंचाना है।
SP अभिषेक धीमान से सवाल—जब मामला इतना गंभीर है तो जनता के सामने स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही?
नीरज का मामला अब केवल एक परिवार की न्याय की मांग तक सीमित नहीं है। यह पुलिस जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ा सवाल बन चुका है।
घटना को 23 दिन हो चुके हैं।
नीरज का वीडियो सामने आ चुका है।
परिवार का दावा है कि वह पुलिस को पहले ही बयान दे चुका है।
फोरेंसिक रिपोर्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
गिरफ्तारी को लेकर परिवार लगातार मांग कर रहा है।
लेकिन आखिर पुलिस की जांच कहां तक पहुंची है?
यदि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है, तो पुलिस प्रशासन को उसकी प्रगति के बारे में उचित जानकारी साझा करने में क्या बाधा है?
क्या SP अभिषेक धीमान को इस मामले में स्वयं सामने आकर जनता और पीड़ित परिवार को यह नहीं बताना चाहिए कि आखिर जांच किस चरण में है?
जब वरिष्ठ अधिकारी गंभीर मामलों में स्थिति स्पष्ट नहीं करते, तो लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठने लगते हैं।
क्या कहीं कोई गड़बड़ी है? क्या जांच किसी दबाव में प्रभावित हो रही है? या फिर पुलिस के पास देरी की कोई ठोस वजह है?
इन आशंकाओं को दूर करने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि पुलिस प्रशासन तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करे।
किसी अधिकारी या व्यक्ति पर बिना प्रमाण आरोप लगाना उचित नहीं है, लेकिन जनता के सवालों का जवाब देना भी पुलिस प्रशासन की जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
UT HIMACHAL पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान से अपेक्षा करता है कि वह नीरज के मामले में जांच की वर्तमान स्थिति, फोरेंसिक रिपोर्ट और गिरफ्तारी को लेकर उठ रहे सवालों पर मीडिया क़ो आधिकारिक जानकारी ।
अब जनता से सवाल—क्या इतने गंभीर मामले में पुलिस की चुप्पी उचित है?
क्या SP अभिषेक धीमान को नीरज के मामले में सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए?
क्या 23 दिन बाद भी गिरफ्तारी की स्थिति स्पष्ट न होना चिंता का विषय है?
क्या पुलिस को बताना चाहिए कि फोरेंसिक रिपोर्ट कब तक आने की उम्मीद है?
और क्या वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से जानकारी न मिलने पर जनता के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक नहीं है?
आपकी क्या राय है? क्या बिलासपुर पुलिस को इस मामले में जल्द स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें।
UT HIMACHAL | Unique Today News
सच बात सलीके के साथ
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