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🇮🇳 अल्मोड़ा शोक में डूबा | मात्र 25 वर्ष 8 माह में शहीद हुए वीर लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी 🇮🇳
शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी जी को विनम्र श्रद्धांजलि 🙏#LieutenantBireshwarGoswami #ShaheedBireshwarGoswami #AlmoraShaheed #VeerSapootUttarakhand #IndianArmy #OperationSheruwali #𝙅𝙖𝙞𝙃𝙞𝙣𝙙

🇮🇳 अल्मोड़ा शोक में डूबा | मात्र 25 वर्ष 8 माह में शहीद हुए वीर लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी 🇮🇳 शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी जी को विनम्र श्रद्धांजलि 🙏#LieutenantBireshwarGoswami #ShaheedBireshwarGoswami #AlmoraShaheed #VeerSapootUttarakhand #IndianArmy #OperationSheruwali #𝙅𝙖𝙞𝙃𝙞𝙣𝙙

Nainital, Nainital | Jun 8, 2026

उत्तराखंड की आज की 3 बड़ी खबरें 🚨

📍 रामनगर चैन लूटकांड में 15 दिन बाद भी सुराग नहीं
📍 ऋषिकेश में गंगा के तेज बहाव में सॉफ्टवेयर इंजीनियर लापता
📍 देहरादून में 10 दिनों में 13 बच्चे लापता, पुलिस अलर्ट

ताजा और महत्वपूर्ण खबरों के लिए जुड़े रहिए।
#uttarakhandnews #breakingnews #newsoftheday #haldwaninews #uttarakhandupdate

उत्तराखंड की आज की 3 बड़ी खबरें 🚨 📍 रामनगर चैन लूटकांड में 15 दिन बाद भी सुराग नहीं 📍 ऋषिकेश में गंगा के तेज बहाव में सॉफ्टवेयर इंजीनियर लापता 📍 देहरादून में 10 दिनों में 13 बच्चे लापता, पुलिस अलर्ट ताजा और महत्वपूर्ण खबरों के लिए जुड़े रहिए। #uttarakhandnews #breakingnews #newsoftheday #haldwaninews #uttarakhandupdate

Nainital, Nainital | Jun 7, 2026

Marianne North जब इंग्लैंड से 1878 में पहली बार नैनीताल आयी और उत्तराखंड का पुराना जमाना दिखा दिया ✅

अगर अंग्रेज़ों ने नैनीताल की खोज और विकास न किया होता, तो शायद आज यह खूबसूरत पहाड़ी नगर दुनिया भर में इतना प्रसिद्ध न होता। नैनीताल के इतिहास को समझने में अंग्रेज़ों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। लेकिन केवल शहर बसाने तक ही नहीं, कुछ अंग्रेज़ ऐसे भी थे जिन्होंने अपने काम के माध्यम से पुराने कुमाऊँ और गढ़वाल को हमेशा के लिए अमर कर दिया। इन्हीं में से एक थीं Marianne North (English biologist). 

1878 में इंग्लैंड से Marianne North भारत आयी और वो भारत के कई इलाको में घूमी लेकिन उन्हें कुमाऊ और गढ़वाल क्षेत्र बहुत पसंद आया और उन्होंने यहाँ 2 साल बिताये। इन्ही 2 सालो में उन्होंने नैनीताल, भीमताल, मसूरी और अल्मोड़ा समेत संपूर्ण उत्तराखंड की यात्रा की और उन जगहों की painting करी क्योकि Camera हर किसी के पास हो ये संभव नहीं था बल्कि camera अपने प्रारंभिक दौर में था.

Marianne North ने नैनीताल और संपूर्ण कुमाऊ को अपने पेंटिंग के माध्यम से संजोया जिनकी मदद से हमें ये पता चला की आज से 200 साल पहले का नैनीताल और उत्तराखंड का पहाड़ी क्षेत्र कैसा था.

Marianne North का जन्म 24 August 1830 को Hastings, England में हुआ था  वे दुनिया भर की दुर्लभ वनस्पतियों, पेड़-पौधों और प्राकृतिक दृश्यों को चित्रों के माध्यम से संरक्षित करने के लिए जानी जाती हैं.. उन्होंने विवाह नहीं किया और अपना जीवन अधिकांश यात्रा और चित्रकला को समर्पित किया.....1871 से 1885 के बीच उन्होंने Asia, Africa, Australia, Northऔर South America सहित कई देशों की यात्रा की।

उस समय फोटोग्राफी इतनी विकसित नहीं थी, इसलिए उनके चित्र वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं......उनका निधन 30 August 1890 को हुआ.

Follow Nainital Mania for Nainital and Uttarakhand History

Marianne North जब इंग्लैंड से 1878 में पहली बार नैनीताल आयी और उत्तराखंड का पुराना जमाना दिखा दिया ✅ अगर अंग्रेज़ों ने नैनीताल की खोज और विकास न किया होता, तो शायद आज यह खूबसूरत पहाड़ी नगर दुनिया भर में इतना प्रसिद्ध न होता। नैनीताल के इतिहास को समझने में अंग्रेज़ों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। लेकिन केवल शहर बसाने तक ही नहीं, कुछ अंग्रेज़ ऐसे भी थे जिन्होंने अपने काम के माध्यम से पुराने कुमाऊँ और गढ़वाल को हमेशा के लिए अमर कर दिया। इन्हीं में से एक थीं Marianne North (English biologist). 1878 में इंग्लैंड से Marianne North भारत आयी और वो भारत के कई इलाको में घूमी लेकिन उन्हें कुमाऊ और गढ़वाल क्षेत्र बहुत पसंद आया और उन्होंने यहाँ 2 साल बिताये। इन्ही 2 सालो में उन्होंने नैनीताल, भीमताल, मसूरी और अल्मोड़ा समेत संपूर्ण उत्तराखंड की यात्रा की और उन जगहों की painting करी क्योकि Camera हर किसी के पास हो ये संभव नहीं था बल्कि camera अपने प्रारंभिक दौर में था. Marianne North ने नैनीताल और संपूर्ण कुमाऊ को अपने पेंटिंग के माध्यम से संजोया जिनकी मदद से हमें ये पता चला की आज से 200 साल पहले का नैनीताल और उत्तराखंड का पहाड़ी क्षेत्र कैसा था. Marianne North का जन्म 24 August 1830 को Hastings, England में हुआ था वे दुनिया भर की दुर्लभ वनस्पतियों, पेड़-पौधों और प्राकृतिक दृश्यों को चित्रों के माध्यम से संरक्षित करने के लिए जानी जाती हैं.. उन्होंने विवाह नहीं किया और अपना जीवन अधिकांश यात्रा और चित्रकला को समर्पित किया.....1871 से 1885 के बीच उन्होंने Asia, Africa, Australia, Northऔर South America सहित कई देशों की यात्रा की। उस समय फोटोग्राफी इतनी विकसित नहीं थी, इसलिए उनके चित्र वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं......उनका निधन 30 August 1890 को हुआ. Follow Nainital Mania for Nainital and Uttarakhand History

Nainital, Nainital | Jun 7, 2026