शंकरगढ़ पहाड़ी पर हरित महाअभियान: 10 हजार पौधों से गूंजी हरियाली की मुहिम
देवास। अमृत हरित महाअभियान के तहत शुक्रवार को शंकरगढ़ पहाड़ी पर वृहद पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संस्थाओं, विद्यार्थियों और पर्यावरण प्रेमियों ने मिलकर 10 हजार पौधों का रोपण किया। अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ शंकरगढ़ पहाड़ी को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करना है।
कार्यक्रम की शुरुआत विधायक गायत्री राजे पवार ने महापौर गीता अग्रवाल, महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल, कलेक्टर ऋतुराज सिंह, पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत, नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ त्रिवेणी पौधारोपण कर की।
विधायक गायत्री राजे पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "एक पेड़ मां के नाम" अभियान से प्रेरित होकर बड़ी संख्या में लोग पौधारोपण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण और बेहतर जलवायु देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने शंकरगढ़ पहाड़ी को सुरक्षित, हरा-भरा और पर्यावरणीय दृष्टि से विकसित करने का संकल्प दोहराया।
महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल ने बताया कि अभियान में सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रशासनिक अमले ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने पौधे लगाने के साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि नगर निगम ने 1 लाख 70 हजार पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने कहा कि शंकरगढ़ पहाड़ी पर 10 हजार से अधिक पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया था और इसमें बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही। उन्होंने नागरिकों से पौधारोपण के साथ पौधों के संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन, नगर निगम, औद्योगिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से शहरभर में पौधारोपण अभियान लगातार जारी है। अब तक विभिन्न स्थानों पर 75 हजार से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि शंकरगढ़ पहाड़ी पर अकेले 10 हजार पौधों का रोपण किया गया।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, पार्षदों, एल्डरमैन, विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों, विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।