Public App Logo
Jansamasya
News
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
India
Coronavirus
कांग्रेस
मौत
Accident
Congress
Modi
Delhi
Viral
Rajasthan
मध्यप्रदेश
Bollywood
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Mp
Madhyapradesh
Pmmodi
Rahulgandhi
Chhattisgarh
Uttarpradesh
Haryana
Uttarakhand

अम्बाला: SMO सीधी भर्ती को लेकर अंबाला में डॉक्टरों की हड़ताल का नहीं दिखा असर

Ambala, Ambala | Dec 10, 2025
हरियाणा में SMO की सीधी भर्ती व अन्य मांगों को लेकर डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान कर दिया है। लेकिन अंबाला में यह हड़ताल पूरी तरह बेअसर नजर आ रही है। हमारी टीम ने शहर के नागरिक अस्पताल पहुंचकर हालातों का जायज़ा लिया,तो पाया कि अस्पताल में सभी डॉक्टर रोज़ाना की तरह ही अपनी ड्यूटी निभाते हुए मरीजों का ईलाज कर रहे हैं। न सिर्फ OPD बल्कि इमरजेंसी सेवाएं भ

MORE NEWS

I got over 5,500 reactions on one of my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

I got over 5,500 reactions on one of my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

Ambala, Ambala | Jul 16, 2026

भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र,और बहन सुभद्रा,की भव्य रथ यात्रा, 16 जुलाई 2026 से ओडिशा के पुरी मे निकाली जा रही है।
ओडिशा के पुरी में हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को, निकाली जाने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, दुनिया का सबसे बड़ा और भव्य रथ उत्सव है। इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा लकड़ी के विशाल रथों पर सवार होकर, अपनी मौसी के घर 'गुंडिचा मंदिर  जाते है।
यात्रा में सबसे आगे बड़े भाई बलभद्र का तालध्वज रथ, बीच में बहन सुभद्रा का दर्पदलन (पद्मध्वज) रथ, और अंत में भगवान जगन्नाथ का विशाल नंदीघोष रथ चलता है।
   तीनों भाई-बहन गुंडिचा मंदिर में सात दिनों तक विश्राम करते हैं। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी को वे अपने मुख्य मंदिर लौट आते हैं, जिसे बहुदा यात्रा कहा जाता है। 
मान्यता है कि जो भी भक्त पूरी के 'बड़ा दांडा' (सड़क) पर रथ खींचने में शामिल होता है, उसे सौ यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र,और बहन सुभद्रा,की भव्य रथ यात्रा, 16 जुलाई 2026 से ओडिशा के पुरी मे निकाली जा रही है। ओडिशा के पुरी में हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को, निकाली जाने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, दुनिया का सबसे बड़ा और भव्य रथ उत्सव है। इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा लकड़ी के विशाल रथों पर सवार होकर, अपनी मौसी के घर 'गुंडिचा मंदिर जाते है। यात्रा में सबसे आगे बड़े भाई बलभद्र का तालध्वज रथ, बीच में बहन सुभद्रा का दर्पदलन (पद्मध्वज) रथ, और अंत में भगवान जगन्नाथ का विशाल नंदीघोष रथ चलता है। तीनों भाई-बहन गुंडिचा मंदिर में सात दिनों तक विश्राम करते हैं। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी को वे अपने मुख्य मंदिर लौट आते हैं, जिसे बहुदा यात्रा कहा जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त पूरी के 'बड़ा दांडा' (सड़क) पर रथ खींचने में शामिल होता है, उसे सौ यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

Ambala, Ambala | Jul 16, 2026

विश्व प्रसिद्ध भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा, पुरी (ओडिशा) का भव्य वार्षिक उत्सव है। इस पावन अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं। इस दौरान लाखों श्रद्धालु लगभग 3 किलोमीटर लंबे बड़ा डांडा (ग्रैंड एवेन्यू) मार्ग पर तीनों विशाल, नए निर्मित लकड़ी के रथों को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।
इस महापर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत विशेष है—
🔸 देवताओं के रथ:
• भगवान जगन्नाथ 45 फीट ऊँचे नंदीघोष रथ पर विराजमान होते हैं।
• भगवान बलभद्र 44 फीट ऊँचे तलध्वज रथ पर यात्रा करते हैं।
• देवी सुभद्रा 43 फीट ऊँचे दर्पदलन रथ पर विराजमान होती हैं।
🔸 छेरा पहंरा (Chhera Pahanra):
रथ यात्रा प्रारंभ होने से पहले पुरी के गजपति महाराजा स्वर्ण झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करते हैं। यह पवित्र परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं।
🔸 गुंडिचा प्रवास एवं बहुदा यात्रा:
तीनों देवता सात दिनों तक गुंडिचा मंदिर (जिसे उनकी मौसी/बुआ का घर भी माना जाता है) में विराजते हैं। इसके बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से श्री जगन्नाथ मंदिर लौटते समय मौसी माँ मंदिर में रुककर भगवान को विशेष प्रसाद पोड़ा पीठा (एक पारंपरिक मीठा पकवान) अर्पित किया जाता है।
🙏 जय जगन्नाथ 🙏

विश्व प्रसिद्ध भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा, पुरी (ओडिशा) का भव्य वार्षिक उत्सव है। इस पावन अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं। इस दौरान लाखों श्रद्धालु लगभग 3 किलोमीटर लंबे बड़ा डांडा (ग्रैंड एवेन्यू) मार्ग पर तीनों विशाल, नए निर्मित लकड़ी के रथों को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। इस महापर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत विशेष है— 🔸 देवताओं के रथ: • भगवान जगन्नाथ 45 फीट ऊँचे नंदीघोष रथ पर विराजमान होते हैं। • भगवान बलभद्र 44 फीट ऊँचे तलध्वज रथ पर यात्रा करते हैं। • देवी सुभद्रा 43 फीट ऊँचे दर्पदलन रथ पर विराजमान होती हैं। 🔸 छेरा पहंरा (Chhera Pahanra): रथ यात्रा प्रारंभ होने से पहले पुरी के गजपति महाराजा स्वर्ण झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करते हैं। यह पवित्र परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं। 🔸 गुंडिचा प्रवास एवं बहुदा यात्रा: तीनों देवता सात दिनों तक गुंडिचा मंदिर (जिसे उनकी मौसी/बुआ का घर भी माना जाता है) में विराजते हैं। इसके बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से श्री जगन्नाथ मंदिर लौटते समय मौसी माँ मंदिर में रुककर भगवान को विशेष प्रसाद पोड़ा पीठा (एक पारंपरिक मीठा पकवान) अर्पित किया जाता है। 🙏 जय जगन्नाथ 🙏

Ambala, Ambala | Jul 16, 2026

अम्बाला: SMO सीधी भर्ती को लेकर अंबाला में डॉक्टरों की हड़ताल का नहीं दिखा असर - Ambala News