*पूरी दुनिया घूम लो घर जैसी खुशी कहीं नहीं मिलेगी-आचार्य पुलकसागर महाराज*
*जीवन में कर्म उदय में आने पर क्रोध करने की बजाय वितरागी बने ओर संयम रखे*
*आचार्य पुलकसागर ससंघ के सानिध्य में सूर्यमहल में मंगल दिव्य देशना जारी*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ) 28 अक्टूबर। जीवन में परिवार से कभी कषाय मत करना उनके साथ जिंदगी गुजारनी है। एक बार परिवार के सदस्यों से तीखी कषाय हो गई तो क्षमा मांगने पर भी मन जुड़ने वाला नहीं है। हमारा एक छोटा सा कदम रिश्तों को प्रगाढ़ भी कर सकता ओर बिगाड़ भी सकता है। हम दुनिया में कितना भी घूम ले पर जो खुशी घर में मिलेगी वह कहीं नहीं मिल सकती। खुशी पाने के लिए हमे अपनी जीवनशैली बदलनी पड़ेगी। ये विचार श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में बुधवार को अंतिम चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला ‘‘जीवन जीने की कला’’ पर मंगल दिव्य देशना के आठवें दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन में परिवार के सदस्यों का स्थान दूसरा नहीं ले सकता है ऐसे में उनको उचित स्थान प्रदान करने पर घर स्वर्ग बन जाएगा ओर कषाय बंध भी नहीं होगा। परिवार के सदस्यों के स्थान बदलने से रिश्ते खत्म हो जाते है। जीवन में माता-पिता व गुरू का स्थान दूसरा कोई नहीं ले सकता।
आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य अपने कर्मो के अधीन है ओर मनुष्य जन्म कर्म फल भोगने के लिए नहीं बल्कि सुधारने के लिए मिला है। कर्म भोगने के लिए तो नरक,तिर्यंच व देव गति है, एक मात्र मनुष्य गति है जिसमें कर्म सुधारे या क्षय किए जा सकते है। मनुष्य में कर्म बांधने, भोगने या नाश करने की ताकत है। हमारा अधिकतर समय कर्म बांधने या भोगने में जा रहा है ओर कर्म रोकने के प्रयास नहीं हो रहे है। कर्म रोकने के लिए संयम भाव रखना होगा। उन्होंने कहा कि कर्म उदय में आने पर क्रोध करने की बजाय वितरागी बने। रागी, द्धेषी बनने पर कर्म का बोझ बढ़ जाएगा। हमने सब सुख भोग लिए तो आपके पुण्य का खजाना खाली हो जाएगा। पुण्य को भोगने की बजाय उसे बचाने का प्रयास करे।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि क्रोध, मान, माया व लोभ से सभी को बचना है। आप कषाय को जितना अधिक समय देंगे वह अपनी जकड़ उतनी मजबूत करते जाएंगे। कषायों को जो पकड़े रहेगा वह दुःख पाएगा ओर जो छोड़ देगा वह सुख पाएगा। क्रोध को छह माह का लंबा समय दे दिया तो अनंतानुबंधी बन अनंत जन्मों तक दर्द प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि अपने भीतर कषायों को जमा करने की बजाय डिलीट करते रहे। कषाय जितना लंबा होगा दर्द भी उतना अधिक गहरा होगा।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि प्रवचन के शुरू में पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य पुण्यार्जक परिवार ने प्राप्त किया। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि 30 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 8.45 से 10 बजे तक आचार्यश्री के मुखारबिंद से दिव्य देशना प्राप्त होगी। इस दौरान प्रतिदिन शाम 6.30 से 7.30 बजे तक आनंद यात्रा (प्रश्न मंच) का आयोजन हो रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।
Bhilwara, Bhilwara | Oct 28, 2026