भाई के निधन को अभी 5 दिन भी नहीं हुए... और सूतक काल में देवघर के धार्मिक शिविर में पहुंच गए?
😡क्या सनातन धर्म के नियम-कानून सिर्फ आम जनता के लिए हैं?
वीआईपी (VIP) लोगों के लिए कोई मर्यादा नहीं?
जब परिवार में सूतक (अशौच) लगा हो, तो 13 दिनों तक किसी भी धार्मिक पंडाल या श्रद्धालुओं के बीच जाना शास्त्रों के अनुसार वर्जित है।
क्या वहां आने वाले भोले भक्तों का गंगाजल और उनकी पूजा अपवित्र नहीं होगी?
राजनीति और रसूख अपनी जगह है, लेकिन बाबा बैद्यनाथ के दरबार में धर्म की मर्यादा सर्वोपरि होनी चाहिए!
आप लोगों का क्या सोचना है?
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