चित्रकूट में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं...
डकैतों के खात्मे का दावा करने वाले चित्रकूट में अब गरीब मरीजों के साथ कथित वसूली और निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी कराने पहुंचने वाली महिलाओं और उनके तीमारदारों से कथित तौर पर 15 हजार रुपये तक की रकम मांगी जाती है।
इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि कुछ डॉक्टरों, दलालों और आशा कार्यकर्ताओं की कथित मिलीभगत से मरीजों को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पतालों में रेफर कराया जाता है, जहां इलाज और डिलीवरी के नाम पर गरीब परिवारों से हजारों-लाखों रुपये वसूले जाते हैं।
मामले में तीमारदारों की ओर से लेनदेन से जुड़े वीडियो, स्क्रीनशॉट और बयान सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों ने इन आरोपों को गलत बताया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सरकारी अस्पताल में इलाज और डिलीवरी की व्यवस्था है, तो गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों का रास्ता क्यों दिखाया जा रहा है?
और अगर लगाए गए आरोप गलत हैं, तो सामने आए वीडियो और अन्य साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं?
इसी मुद्दे को समाजसेवी अर्चना नितिन उपाध्याय ने भी गंभीरता से उठाया है। उन्होंने गरीब मरीजों के साथ किसी भी तरह की मनमानी के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
तो आखिर अर्चना नितिन उपाध्याय ने इस पूरे मामले को लेकर क्या कहा?
सुनिए, उन्होंने क्या कुछ कहा...