नवादा में सेव की खेती, हर सीजन 25 से 34 लाख तक की कमाई । Etv Bharat पर देखिए Sonu Singh Journalist की ग्राउंड रिपोर्ट
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Nawada, Nawada | Apr 13, 2026 नवादा के ‘एप्पल मैन’ विनय प्रभाकर: इजरायली तकनीक से गर्म प्रदेश में सेब की खेती, गांव में ही तैयार हो रहा ‘कश्मीर जैसा फल’ ⸻ नवादा में ‘सेब क्रांति’ की शुरुआत अब तक बिहार की पहचान मखाना, सिंघाड़ा, लीची, धान और केला जैसी पारंपरिक फसलों से रही है, लेकिन अब इस सूची में सेब भी जुड़ने जा रहा है। आमतौर पर कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में होने वाली इस फसल को नवादा के सदर प्रखंड स्थित संकुलाचक गांव के शिक्षक विनय प्रभाकर ने अपने प्रयोग से संभव कर दिखाया है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही तकनीक और मेहनत से गर्म प्रदेश में भी सेब की खेती की जा सकती है। ⸻ इजरायली तकनीक से शुरू की आधुनिक खेती स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के बाद बचने वाले समय में विनय प्रभाकर ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग को अपनाया। उन्होंने इजरायल से करीब 250 सेब के पौधे मंगवाकर वैज्ञानिक तरीके से बागवानी शुरू की। पिछले दो वर्षों से वे इस खेती में जुटे हैं और अब पौधों में फल लगना भी शुरू हो चुका है। खास बात यह है कि जून महीने में, जब बाजार में सेब की कीमत अधिक रहती है, उसी समय इनके बाग में फल तैयार हो जाते हैं, जिससे बेहतर मुनाफे की संभावना बढ़ जाती है। ⸻ कम लागत में ज्यादा मुनाफे की उम्मीद विनय प्रभाकर के अनुसार, एक पौधे की कीमत लगभग 600 रुपये और परिवहन पर करीब 40 रुपये का खर्च आता है। शुरुआती वर्षों में एक पेड़ से लगभग 40 किलो उत्पादन होता है, जो 5 साल बाद बढ़कर 120 से 135 किलो तक पहुंच सकता है। यदि 250 पौधों से औसतन उत्पादन लिया जाए और बाजार में 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक्री हो, तो हर सीजन में करीब 30 से 34 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है।