सरकारी कर्मचारी अपनी पीड़ा भी नहीं बता सकता, खासतौर पर पुलिस महकमा, भ्रष्टाचार कैसे होता ये सबको पता होता है लेकिन उसको कोई उजागर नहीं कर सकता, आवाज उठाई तो नौकरी गयी।
*पुलिस अफसरों को रिश्वतखोर कहने वाले सिपाही की नौकरी गई:* लखनऊ में तैनात थे सुनील शुक्ला, कहा- सच बोलने का इनाम मिला
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