पुलिस लाइन चौराहा सहित अन्य जगहों पर लगे अखिलेश यादव विरोधी पोस्टरों से मचा राजनीतिक बवाल, सपा कार्यकर्ताओं ने की कार्रवाई की मांग
रायबरेली। शहर कोतवाली क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विरोध में लगाए गए विवादित पोस्टरों ने जिले की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। रातों-रात लगाए गए इन पोस्टरों को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
आपको बता दे कि आज दिनांक 2026 दिन सोमवार को समय करीब 8:00 बजे यह पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं पोस्टरों में समाजवादी पार्टी और यादव समाज को लेकर कई आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणियां लिखी गई हैं। एक पोस्टर पर लिखा गया है, "लाल टोपी, साइकिल निशान, यादव वाद इनकी पहचान" तथा उसके साथ एक समाचार चैनल की कटिंग लगाई गई है, जिसमें यूपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन अनिल यादव की नियुक्ति से जुड़ी खबर प्रकाशित दिखाई गई है।
दूसरे पोस्टर में "सिपाही हो या लेखपाल, एक जाति हुई मालामाल" जैसे नारे लिखे गए हैं। वहीं एक अन्य पोस्टर में "पीएफ है नाम का भाई, यादव वाद है अपनी कमाई" जैसी टिप्पणी के साथ विभिन्न समाचार पत्रों की कटिंग लगाई गई है। पोस्टरों में समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं और पदाधिकारियों से जुड़े पुराने विवादों और घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
इन पोस्टरों के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इसे सुनियोजित राजनीतिक साजिश बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सपा नेताओं का कहना है कि इस प्रकार के पोस्टर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और राजनीतिक विद्वेष फैलाने का प्रयास हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल पोस्टर लगाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने तथा कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
पोस्टरों के लगने की सूचना मिलते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि आखिर कौन व्यक्ति या संगठन रातों-रात शहर के विभिन्न चौराहों पर इतने बड़े पैमाने पर ये पोस्टर लगाकर चला गया।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि मामले की गंभीरता से जांच की जाए तो संबंधित क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से पोस्टर लगाने वाले व्यक्तियों की पहचान की जा सकती है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन विवादित पोस्टरों को लेकर जिले का राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और जांच पर टिकी हैं कि आखिर इन पोस्टरों के पीछे कौन लोग हैं और उनका उद्देश्य क्या था।