बस्ता रहित दिवस पर गढ़कवि देवेंद्र उनियाल ने लोकभाषा के संरक्षण का दिया संदेश
कारगिल शहीद कुलदीप सिंह राजकीय इंटर कॉलेज खण्डाह, खिर्सू, पौड़ी गढ़वाल में आयोजित बस्ता रहित दिवस के अवसर पर सुप्रसिद्ध गढ़कवि एवं साहित्यकार श्रद्धेय देवेंद्र उनियाल जी ने विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति 2020 एवं लोकभाषा के विविध आयामों पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए कहा कि लोकभाषा हमारी संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन की पहचान है। इसके संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए केवल साहित्यकारों ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति और विशेषकर युवा पीढ़ी को अपनी भूमिका निभानी होगी।
इस अवसर पर उन्होंने अपनी दो कालजयी रचनाओं ‘बोई’ और ‘ढूग्गू’ का भावपूर्ण वाचन भी किया। विद्यार्थियों ने उनकी रचनाओं का आनंद लेते हुए गढ़वाली भाषा के औखाणों तथा लोकभाषा के संरक्षण में गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी जी के योगदान पर भी विस्तार से चर्चा की।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री विक्रम सिंह नेगी ने गढ़कवि देवेंद्र उनियाल जी का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए लोकभाषा के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए उनके निरंतर प्रयासों की सराहना की।
विद्यालय के प्रवक्ता श्री जसपाल सिंह बिष्ट ने नरेंद्र सिंह नेगी जी के गीतों के माध्यम से कार्यक्रम को और अधिक रोचक एवं जीवंत बना दिया।
इस अवसर पर श्री गोविंद नथवान, श्री हेम चंद्र ममगाईं, श्री जसपाल सिंह बिष्ट एवं श्रीमती कुसुमलता थपलियाल ने भी लोकभाषा के महत्व और उसके संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का मंच संचालन वरिष्ठ शिक्षक श्री महेश गिरि ने किया।
बस्ता रहित दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए केवल पुस्तकों से इतर सीखने का अवसर ही नहीं रहा, बल्कि अपनी लोकभाषा, लोकसंस्कृति और जड़ों से जुड़ने का एक सार्थक प्रयास भी बना।
लोकभाषा बचेगी, तभी लोकसंस्कृति बचेगी।
जय गढ़भूमि! जय लोकभाषा
Parliament Street, New Delhi | Aug 29, 2026