*महिला एवं बाल विकास निगम के द्वारा सशक्त हुईं बेटियां: सहरसा में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सैकड़ों छात्राओं ने लिया स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर भारत का संकल्प*
*सहरसा, 21.06.2026. रविवार.*
*महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार के निर्देशानुसार जिला हब फॉर एम्पॉवरमेंट ऑफ वीमेन (DHEW), सहरसा द्वारा आज +2 कन्या उच्च आवासीय विद्यालय, सत्तरकटैया, सहरसा में उत्साह, ऊर्जा एवं अनुशासन के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन किया गया* । कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं ने भाग लेकर योगाभ्यास किया तथा स्वस्थ एवं सशक्त जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक योगाभ्यास के साथ हुआ, जहां प्रशिक्षित योग शिक्षक द्वारा छात्राओं को विभिन्न योगासनों, प्राणायाम एवं ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया गया। साथ ही योग के शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक लाभों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि नियमित योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि आत्मविश्वास, एकाग्रता और सकारात्मक सोच का भी विकास करता है।
इस अवसर पर *"बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ"* अभियान के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु सभी उपस्थित छात्राओं के बीच अभियान के लोगोयुक्त टी-शर्ट एवं टोपी का वितरण किया गया। इससे छात्राओं में विशेष उत्साह देखा गया तथा उन्होंने महिला सशक्तिकरण एवं शिक्षा के महत्व को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का सफल पर्यवेक्षण सुश्री काजल चौरसिया, जिला परियोजना प्रबंधक, महिला एवं बाल विकास निगम, सहरसा द्वारा किया गया। वहीं कार्यक्रम के संपूर्ण संचालन, समन्वय एवं व्यवस्थापन की जिम्मेदारी श्री राजा बाबू, जिला मिशन समन्वयक, जिला हब फॉर एम्पॉवरमेंट ऑफ वीमेन, सहरसा द्वारा कुशलतापूर्वक निभाई गई।
अपने संबोधन में अधिकारियों ने कहा कि योग भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है, जिसने आज पूरी दुनिया को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखाया है। योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। छात्राओं को नियमित रूप से योग अपनाने तथा अपने परिवार एवं समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य, खेल शिक्षक एवं अन्य शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। सभी ने छात्राओं को योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। यह आयोजन स्वास्थ्य संवर्धन, महिला सशक्तिकरण एवं बालिका शिक्षा के प्रति जागरूकता का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। छात्राओं के उत्साहपूर्ण सहभागिता ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ, शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बेटियां ही विकसित बिहार और विकसित भारत की मजबूत आधारशिला हैं।