एक ओर अंबिकापुर की गुजरी बाजार के बीच चावल की कालाबाजारी वहीं दूसरी और प्रशासन के आत्म काला पट्टी।
शासकीय चावल,की काला बजारी गरीब के हिस्से का अनाज जब बाज़ार में बिकने लगे,
तो सवाल सिर्फ़ कालाबाज़ारी का नहीं, ज़मीर का भी उठने लगे।
राशन लुटता रहा, फ़ाइलें खामोश रहीं,
आख़िर इस सन्नाटे पर प्रशासन की चुप्पी क्यों रही?