कोटा में शालिनी गौतम का टिकट कटने के बाद समर्थकों ने विरोध और नारेबाजी की, लेकिन शालिनी ने किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने पार्टी के फैसले को सर्वोपरि बताते हुए संगठन के निर्देश पर काम करने और निर्दलीय चुनाव न लड़ने की बात कही। अब सवाल है—ये पार्टी अनुशासन है या नाराजगी छिपाने की रणनीति?