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चम्पावत: UKSSSC परीक्षा पर प्रशासन की कड़ी नजर, डीएम ने किया औचक निरीक्षण

Champawat, Champawat | Jun 14, 2026

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ऑपरेशन प्रहार: लोहाघाट पुलिस ने 4.36 ग्राम स्मैक के साथ तस्कर को किया गिरफ्तार https://champawatkhabar.com/operation-prahar-lohaghat-police-arrested-smuggler-with-4-36-grams-of-smack/

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Champawat, Champawat | Jun 27, 2026

टनकपुर नगरपालिका में विकास कार्य ठप, प्रस्तावों की अनदेखी पर फूटा आक्रोश, सभासदों ने दिया अल्टीमेटम https://champawatkhabar.com/development-work-stalled-in-tanakpur-municipality-anger-erupted-over-ignoring-the-proposals/

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Champawat, Champawat | Jun 27, 2026

चम्पावत : युवाओं के रोजगार के सपने साकार करने की दिशा में जिला प्रशासन की पहल, रोजगार मेले में 52 युवाओं का चयन

प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 'आदर्श चम्पावत' विजन को साकार करने तथा अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एवं जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देशन में जनपद के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने एवं रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास लगातार जारी हैं। इसी क्रम में युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को जिला सेवायोजन कार्यालय, चम्पावत में एक दिवसीय रोजगार मेले का सफल आयोजन किया गया।

चम्पावत : युवाओं के रोजगार के सपने साकार करने की दिशा में जिला प्रशासन की पहल, रोजगार मेले में 52 युवाओं का चयन प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 'आदर्श चम्पावत' विजन को साकार करने तथा अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एवं जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देशन में जनपद के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने एवं रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास लगातार जारी हैं। इसी क्रम में युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को जिला सेवायोजन कार्यालय, चम्पावत में एक दिवसीय रोजगार मेले का सफल आयोजन किया गया।

Champawat, Champawat | Jun 27, 2026

112 साल बाद चर्चा में आई रुद्रप्रयाग के वीर सपूत राइफलमैन बहादुर सिंह रावत की शौर्य गाथा

रुद्रप्रयाग। प्रथम विश्व युद्ध में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले रुद्रप्रयाग के वीर सपूत राइफलमैन स्वर्गीय बहादुर सिंह रावत की शौर्य गाथा 112 वर्ष बाद फिर से चर्चा में है। सेना के अभिलेखों और उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर उनके अद्वितीय साहस और बलिदान को नई पहचान मिली है।

रुद्रप्रयाग जनपद के ग्राम फलई तल्ला कालीफाट (वर्तमान ग्राम फलई, पोस्ट अगस्त्यमुनि, तहसील बसुकेदार) में वर्ष 1880 में जन्मे बहादुर सिंह रावत, स्वर्गीय खंतडू सिंह रावत के पुत्र थे। अपने साहसी और निर्भीक स्वभाव के कारण उन्होंने 26 अक्टूबर 1901 को मात्र 21 वर्ष की आयु में 2/39 रॉयल गढ़वाल राइफल्स में भर्ती होकर सैन्य सेवा शुरू की।

जुलाई 1914 में प्रथम विश्व युद्ध छिड़ने के बाद अक्टूबर 1914 में लैंसडाउन स्थित रेजिमेंट से सैनिकों की टुकड़ी फ्रांस भेजी गई। इसी दल में विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित वीर सैनिक गब्बर सिंह नेगी के साथ राइफलमैन बहादुर सिंह रावत भी शामिल थे।

7 नवंबर 1914 को प्रथम यप्रेस (First Battle of Ypres) के दौरान उन्होंने मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके सम्मान में तत्कालीन सरकार द्वारा उन्हें 'डेथ मैन पैनी' (Death Penny) स्मृति पदक प्रदान किया गया, जिस पर अंकित है—"HE DIED FOR FREEDOM AND HONOUR"।

उस समय जागरूकता के अभाव में उनके बलिदान को वह पहचान नहीं मिल सकी, जिसके वे वास्तविक हकदार थे। लेकिन लगभग 112 वर्ष बाद इस पदक और सेना के रिकॉर्ड के आधार पर उनके शौर्य से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए हैं। लैंसडाउन वॉर मेमोरियल में स्थापित स्मारक, इंडिया गेट तथा नेव शापेल इंडियन मेमोरियल में भी उनका नाम सम्मानपूर्वक अंकित है। उनके अद्वितीय बलिदान और सैन्य इतिहास को सामने आने के बाद पूरे रुद्रप्रयाग जनपद में गर्व की भावना है। इस अवसर पर लैंसडाउन छावनी के स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने भी राइफलमैन बहादुर सिंह रावत के परिजनों को सम्मानित कर उनके अमर बलिदान को नमन किया।

112 साल बाद चर्चा में आई रुद्रप्रयाग के वीर सपूत राइफलमैन बहादुर सिंह रावत की शौर्य गाथा रुद्रप्रयाग। प्रथम विश्व युद्ध में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले रुद्रप्रयाग के वीर सपूत राइफलमैन स्वर्गीय बहादुर सिंह रावत की शौर्य गाथा 112 वर्ष बाद फिर से चर्चा में है। सेना के अभिलेखों और उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर उनके अद्वितीय साहस और बलिदान को नई पहचान मिली है। रुद्रप्रयाग जनपद के ग्राम फलई तल्ला कालीफाट (वर्तमान ग्राम फलई, पोस्ट अगस्त्यमुनि, तहसील बसुकेदार) में वर्ष 1880 में जन्मे बहादुर सिंह रावत, स्वर्गीय खंतडू सिंह रावत के पुत्र थे। अपने साहसी और निर्भीक स्वभाव के कारण उन्होंने 26 अक्टूबर 1901 को मात्र 21 वर्ष की आयु में 2/39 रॉयल गढ़वाल राइफल्स में भर्ती होकर सैन्य सेवा शुरू की। जुलाई 1914 में प्रथम विश्व युद्ध छिड़ने के बाद अक्टूबर 1914 में लैंसडाउन स्थित रेजिमेंट से सैनिकों की टुकड़ी फ्रांस भेजी गई। इसी दल में विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित वीर सैनिक गब्बर सिंह नेगी के साथ राइफलमैन बहादुर सिंह रावत भी शामिल थे। 7 नवंबर 1914 को प्रथम यप्रेस (First Battle of Ypres) के दौरान उन्होंने मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके सम्मान में तत्कालीन सरकार द्वारा उन्हें 'डेथ मैन पैनी' (Death Penny) स्मृति पदक प्रदान किया गया, जिस पर अंकित है—"HE DIED FOR FREEDOM AND HONOUR"। उस समय जागरूकता के अभाव में उनके बलिदान को वह पहचान नहीं मिल सकी, जिसके वे वास्तविक हकदार थे। लेकिन लगभग 112 वर्ष बाद इस पदक और सेना के रिकॉर्ड के आधार पर उनके शौर्य से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए हैं। लैंसडाउन वॉर मेमोरियल में स्थापित स्मारक, इंडिया गेट तथा नेव शापेल इंडियन मेमोरियल में भी उनका नाम सम्मानपूर्वक अंकित है। उनके अद्वितीय बलिदान और सैन्य इतिहास को सामने आने के बाद पूरे रुद्रप्रयाग जनपद में गर्व की भावना है। इस अवसर पर लैंसडाउन छावनी के स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने भी राइफलमैन बहादुर सिंह रावत के परिजनों को सम्मानित कर उनके अमर बलिदान को नमन किया।

Champawat, Champawat | Jun 27, 2026

शारदा नदी में डूबे दूसरे युवक का भी मिला शव, बैराज के गेट नंबर-6 पर फंसा मिला नैतिक सक्सेना का शव https://champawatkhabar.com/dead-body-of-another-youth-who-drowned-in-sharda-river-was-also-found-dead-body-of-naitik-saxena-was-found-stuck-at-gate-number-6-of-the-barrage/

शारदा नदी में डूबे दूसरे युवक का भी मिला शव, बैराज के गेट नंबर-6 पर फंसा मिला नैतिक सक्सेना का शव https://champawatkhabar.com/dead-body-of-another-youth-who-drowned-in-sharda-river-was-also-found-dead-body-of-naitik-saxena-was-found-stuck-at-gate-number-6-of-the-barrage/

Champawat, Champawat | Jun 26, 2026

चम्पावत: UKSSSC परीक्षा पर प्रशासन की कड़ी नजर, डीएम ने किया औचक निरीक्षण - Champawat News