Home Guard बनने के सपने के लिए रामगढ़, झारखंड की कविता महतो भूखे पेट, बिना जूतों के, साड़ी में नंगे पांव 1600 मीटर दौड़ीं।
पति के निधन के बाद दो बच्चों और बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर है। ससुर खेती करते हैं और कविता भी घर की जिम्मेदारियों के साथ खेती में उनका हाथ बंटाती हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, लेकिन कविता ने अपना सपना नहीं छोड़ा। वह रोज़ सुबह 4 बजे उठकर दौड़ने की तैयारी करती हैं।
न स्पोर्ट्स ड्रेस थी, न दौड़ने के लिए जूते। जिस दिन वह दौड़ने पहुंचीं, उनके साथ हौसला बढ़ाने वाला कोई नहीं था—लेकिन कविता अकेली ही दौड़ पड़ीं।
1600 मीटर की यह दौड़ उन्होंने करीब 6 मिनट में पूरी की, जबकि निर्धारित समय 10 मिनट था।
उस दिन कविता के साथ भले ही कोई नहीं दौड़ा, लेकिन उनकी मेहनत और हौसले की कहानी आज देशभर के लोगों का दिल जीत रही है।
कविता की यह दौड़ सिर्फ Home Guard की वर्दी पाने की नहीं, अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए एक माँ की उम्मीद की दौड़ है।
कविता महतो की मेहनत, हिम्मत और जज़्बे को सलाम और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं देता है। ♥️
video credit- @ankitrunner_academy_04
Kavita Mahato’s Running Barefoot In A Saree To Chasing Her Dream Of Becoming A Home Guard, 1600 Metre Run by Kavita Mahato Inspiring Story, Jharkhand Home Guard Aspirant