पत्नी की मौत के बाद शव ले जाने तक के पैसे नहीं, झांसी मेडिकल कॉलेज की तस्वीर ने झकझोरा
मां के शव के पास घंटों रोती रही मासूम बेटी, पुलिसकर्मी की संवेदनशील पहल बनी सहारा
मानवीयता की मिसाल: झांसी पुलिस ने एंबुलेंस की व्यवस्था कर शव को मध्य प्रदेश स्थित घर भिजवाया
झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी मेडिकल कॉलेज से सामने आई एक मार्मिक घटना ने हर संवेदनशील व्यक्ति को भावुक कर दिया। 36 वर्षीय महिला की मृत्यु के बाद उसके परिजनों के पास शव को गृह जनपद ले जाने तक के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर पति अपनी पत्नी के शव के पास घंटों बेबस बैठा रहा, जबकि करीब आठ वर्ष की मासूम बेटी अपनी मां के शव के पास बिलखती रही। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर गया।
जानकारी के अनुसार, 4 सितंबर 2026 को थाना नवाबाद क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज परिसर में उपचार के दौरान एक 36 वर्षीय महिला की मृत्यु हो गई। महिला का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था और शव को अपने गृह जनपद ओरछा, जिला निवाड़ी (मध्य प्रदेश) ले जाने के लिए उनके पास पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं थी। मजबूरी में परिजन मेडिकल कॉलेज परिसर में ही शव के साथ बैठे रहे।
इसी दौरान मेडिकल चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों की नजर इस परिवार पर पड़ी। मामले की जानकारी मिलते ही प्रभारी मेडिकल चौकी ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तत्काल पहल की। पुलिस ने परिजनों से समन्वय स्थापित किया और एंबुलेंस की व्यवस्था कर महिला के शव को सम्मानपूर्वक उसके गृह जनपद ओरछा भिजवाया।
यह घटना केवल एक परिवार की आर्थिक बेबसी की कहानी नहीं, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कठिन परिस्थितियों में प्रशासन और पुलिस की संवेदनशील पहल किसी पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। झांसी पुलिस की इस मानवीय कार्रवाई की स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर भी सराहना की जा रही है।
हालांकि यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरतमंद परिवारों को ऐसी परिस्थितियों में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा की अपील
किसी भी अस्पताल में यदि कोई जरूरतमंद परिवार आर्थिक संकट में दिखाई दे तो समाज, स्वयंसेवी संस्थाएं और प्रशासन मिलकर उनकी सहायता के लिए आगे आएं। पुलिस द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायक है। मानवता और करुणा ही किसी भी सभ्य समाज की सबसे बड़ी पहचान है।
जनहित सुझाव:
अस्पतालों में असहाय परिवारों के लिए आपातकालीन सहायता तंत्र को और मजबूत किया जाए।
जरूरतमंद मरीजों और परिजनों को सरकारी सहायता योजनाओं की तत्काल जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
सामाजिक संगठन और नागरिक ऐसे परिवारों की मदद के लिए आगे आएं।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की मानवीय पहल को प्रोत्साहित किया जाए।
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