हमारा बस्तर… हमारी आस्था… हमारी पहचान। ❤️🙏
विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा की पावन रस्म ‘डेरी गड़ाई’ आज जगदलपुर के सिरहासार भवन में पारंपरिक विधि-विधान, पूजा-अर्चना और लोक परंपराओं के साथ संपन्न हुई। ग्राम बिलोरी से लाए गए पवित्र काष्ठ स्तंभों की स्थापना के साथ मंडप आच्छादन का मंगल विधान पूर्ण हुआ और पारंपरिक हल्दी उत्सव ने पूरे वातावरण को उल्लास से भर दिया।
बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं है—यह हमारी जनआस्था, हमारी आदिवासी एवं लोक संस्कृति, हमारी परंपराओं और पीढ़ियों से चले आ रहे सामाजिक जुड़ाव का जीवंत स्वरूप है। मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, पुजारी, गायता, सिरहा-गुनिया सहित हमारे पारंपरिक समाज की सहभागिता इस अनुपम विरासत को आज भी उसी आत्मीयता के साथ जीवंत बनाए हुए है।
बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष के रूप में इस पावन पूजा-विधान में सम्मिलित होकर मां दंतेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह मेरे लिए अत्यंत भावपूर्ण क्षण रहा।
माँ दंतेश्वरी �
32 views | Bastar, Chhattisgarh | Sep 24, 2026