#ड्रैगन फ्रूट बना ‘लाल सोना’, दो #शिक्षकों ने लिखी प्रेरणादायक कहानी
#झारखण्ड के #बोकारो में बिक रहे, ड्रैगन फ्रूट, की यह कहानी सिर्फ खेती की नहीं, बल्कि सपनों को हकीकत में बदलने की मिसाल है।
कोरोना लॉकडाउन के सन्नाटे में जब पूरी दुनिया थम सी गई थी, तब बोकारो के चांदो पंचायत के उत्क्रमित सरकारी विद्यालय में कार्यरत दो सरकारी शिक्षक—दिनेश कुमार सिंह और बलदेव मांझी—ने उम्मीद का वह बीज बोया। जो आज उन्हें “किसान-उद्यमी” की नई पहचान दे रहा है।
बोकारो की मिट्टी से निकला यह लाल सोना अब झारखंड के बोकारो, रांची, जमशेदपुर ही नहीं, बल्कि कोलकाता तक अपनी मिठास फैला रहा है। एक एकड़ में 8–9 लाख रूपये की आमदनी।
कभी ड्रैगन फ्रूट जिसे विदेशी और महंगा फल माना जाता था, वही आज बोकारो की सड़कों के किनारे ऐसे बिक रहे हैं, जैसे कोई मूंगफली हो। यह कहानी सिखाती है—सपने वही सच होते हैं, जिन्हें हालात नहीं हिम्मत पूरा करती है।
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Chas, Bokaro | Jun 28, 2026