जिला नूंह-मेवात के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय छपेड़ा की पहल -
हुनर मेला: आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम
नूंह।। The Voice of Mewat
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, छपेड़ा में पिछले *लगातार तीन वर्षों से हुनर दिवाली मेला* आयोजित किया जा रहा है। इस मेले का उद्देश्य केवल एक कार्यक्रम करना नहीं है, बल्कि बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करना है।
*हमारे पूर्व छात्रों की सफलता की कहानी:*
हमारे विद्यालय के पूर्व छात्रों ने *हस्तशिल्प सेवा केन्द्र, रेवाड़ी* से अपने *आर्टिज़न कार्ड* बनवाए हैं। यह केन्द्र हरियाणा का एकमात्र केन्द्र है जो *वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार* के अधीन कार्य करता है।
आज वही बच्चे विभिन्न विद्यालयों में जाकर बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। एक विद्यालय में लगभग *दो घंटे के सत्र* के लिए सरकार की ओर से उन्हें *प्रति आर्टिज़न प्रति दिन 6000 रुपये* मिलते हैं।
इस समय ये बच्चे स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं और उन्होंने *12वीं के बाद अपनी पढ़ाई का खर्च स्वयं उठाया है*। आज वे अच्छी-खासी आय अर्जित करने में सक्षम हैं और आत्मनिर्भर बन चुके हैं।
*इस वर्ष के मेले की विशेषता:*
इस बार आस-पास के प्राचार्यों ने भी अपने बच्चों को प्रेरित किया है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग *5-6 विद्यालय* इस मेले में भागीदारी कर रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कुरथला
- राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, के.के.पुर
- राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, गंगोली
- राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, घासेड़ा
- राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, उजीना
- सलवान पब्लिक स्कूल, गुरुग्राम आदि
*हुनर दिवाली मेले के मुख्य उद्देश्य:*
*1.* बच्चों को केवल नौकरी चाहने वाला नहीं, बल्कि *नौकरी देने वाला (Job Creator)* बनने की प्रेरणा देना।
*2.* *नई शिक्षा नीति 2020* के सिद्धांत को व्यावहारिक रूप देना - कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना।
*3.* विद्यार्थियों में *उद्यमिता (Entrepreneurship)* की भावना विकसित करना, ताकि वे अपने हुनर को व्यापार में बदलना सीखें।
*4.* ग्रामीण महिलाओं और कारीगरों को अपना उत्पाद बेचने के लिए *सीधा बाज़ार (Direct Market)* उपलब्ध कराना और *महिला सशक्तिकरण* को बढ़ावा देना।
*5.* *वोकल फॉर लोकल* और *मेक इन इंडिया* के तहत स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और चीनी उत्पादों पर निर्भरता कम करना।
*6.* भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को नई पीढ़ी से जोड़ना तथा *सांस्कृतिक विरासत* का संरक्षण करना।
*7.* विभिन्न विद्यालयों के बीच *सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा* की भावना विकसित करना।
*8.* अभिभावकों और समाज की सोच बदलना - शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री और नौकरी नहीं, बल्कि *आत्मनिर्भर जीवन* है।
*9.* बच्चों में *वित्तीय साक्षरता, विपणन कौशल, संवाद कौशल और टीम वर्क* का विकास करना।
*10.* समाज के सभी वर्गों - अधिकारियों, सरपंचों, अभिभावकों और कारीगरों को एक मंच पर लाकर *समुदाय और विद्यालय के बीच सेतु* बनाना।
*11.* छात्रों को *आर्टिज़न कार्ड, हस्तशिल्प सेवा केन्द्र जैसी सरकारी योजनाओं* से जोड़कर उन्हें प्रमाणित और स्वरोजगार के योग्य बनाना।
*12.* पर्यावरण के अनुकूल, *हरा-भरा और स्वच्छ दीपावली मेला* मनाकर स्वच्छता और स्थिरता का संदेश देना।
Hisar, Hissar | Oct 11, 2026