**पत्रकारों में दिखा रोष, कलेक्ट्रेट तक निकला पैदल मार्च**
----एसओजी की कार्रवाई पर घिरे अफसर, कार्रवाई का दिया एसपी ने आश्वासन
----तीन घंटे लापता रहे पत्रकार, बिना सूचना हिरासत पर सवाल
शाहजहाँपुर। दो पत्रकारों को रास्ते से उठाकर पूछताछ के लिए ले जाने की घटना ने जिले में पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को इसका व्यापक असर देखने को मिला, जब जिलेभर के पत्रकार एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए और प्रेस क्लब से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालते हुए विरोध दर्ज कराया। कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी के उपलब्ध न होने से नाराज पत्रकारों का आक्रोश और बढ़ गया। वे सीधे विकास भवन के सभागार पहुंच गए, जहां प्रभारी मंत्री की बैठक प्रस्तावित थी। यहां पत्रकारों ने धरना देकर साफ संदेश दिया कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी सामने आकर जवाब नहीं देंगे, वे पीछे नहीं हटेंगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंततः पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित को स्वयं मौके पर आना पड़ा। बंद कमरे में कई घंटों तक चली वार्ता में एसपी ने स्वीकार किया कि एसओजी टीम से कार्रवाई में चूक हुई है। उन्होंने कहा कि गलत फीडबैक के आधार पर यह स्थिति बनी। साथ ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। हालांकि, पत्रकारों ने स्पष्ट कर दिया कि आश्वासन के बजाय उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए और यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। मामला गुरुवार शाम का है, जब हिंदी खबर टीवी चैनल के पत्रकार प्रभाकर मिश्रा और नेटवर्क-10 नेशनल न्यूज चैनल के पत्रकार विवेक मिश्रा पुवायां की ओर जा रहे थे। चिनौर के पास एसओजी टीम ने उन्हें रोक लिया और बिना स्पष्ट कारण बताए अपने साथ ले गई। आरोप है कि इस दौरान उनके मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए गए, जिससे करीब तीन घंटे तक उनका कोई संपर्क नहीं हो सका। इस दौरान परिजन और साथी पत्रकार लगातार जानकारी जुटाने में लगे रहे, लेकिन पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। बाद में पता चला कि डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के काफिले को काले झंडे दिखाने की वायरल वीडियो के सिलसिले में उनसे पूछताछ की गई। पत्रकारों का आरोप है कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के उन्हें अपराधियों की तरह उठाया गया, जो न केवल कानूनसम्मत प्रक्रिया के विपरीत है, बल्कि मीडिया की स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़ा करता है। पत्रकारों ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में एसओजी प्रभारी और संबंधित टीम के तत्काल निलंबन, दोनों पत्रकारों से लिखित माफी तथा भविष्य में किसी भी पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई से पहले मान्यता प्राप्त संगठनों को सूचित करने की मांग की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि 24 घंटे के भीतर कार्रवाई न होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कलेक्ट्रेट और विकास भवन परिसर में दिनभर गहमागहमी रही। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकार बड़ी संख्या में मौजूद रहे।