पशुहारी में नौवीं मुहर्रम: ताशे की गूंज में ताज़ा हुई 'जाने आलम उस्ताद' की यादें
बेल्थरारोड (बलिया): तहसील के पशुहारी में नौवीं मुहर्रम के अवसर पर अकीदत का शानदार मंज़र देखने को मिला। ढोल और ताशे की गूंज के बीच आज मोहतरम नाना जान 'जाने आलम उस्ताद' की शिद्दत से याद आई, जिनकी ताशे की तराश आज भी लोगों के ज़ेहन में ज़िंदा है। हुसैनियत के इस सच्चे अलंबरदार की विरासत को आज की नई पीढ़ी बखूबी आगे बढ़ा रही है। जब नन्हें-मुन्ने बच्चे पूरे जोश के साथ ढोल की थाप का जवाब ताशे की गूंज से दे रहे थे, तो उनमें उस अज़ीम उस्ताद की झलक साफ़ दिखाई दी। बच्चों का यह जज़्बा इस बात का सुबूत है कि यह इमाम आली मक़ाम की फ़ौज है, जहाँ यज़ीदियत का कोई वजूद नहीं।