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Karwi, Chitrakoot | Nov 26, 2024

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संगम चुनाव प्रणाली पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने की मांग, लेखक ने कर्वी में प्रेस वार्ता कर जनप्रतिनिधियों से किया अनुरोध
चित्रकूट। "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए चित्रकूट के लेखक द्वारा तैयार की गई "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में पहल की गई है। लेखक ने इस पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने तथा मीडिया के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाने की मांग की है।
लेखक के अनुसार, "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक में चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 20 चरण, 36 नियम तथा 8 प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। उन्होंने आज गुरुवार की दोपहर 12 बजे कर्वी में मिडिया से बातचीत में कहा  कि यदि इस प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।
लेखक ने बताया कि पुस्तक की लगभग 100 प्रतियां पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, "एक देश, एक चुनाव" समिति के अध्यक्ष, संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। 
लेखक ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पुस्तक का अध्ययन करें, इसके विषय में सार्वजनिक रूप से अपने विचार रखें तथा संसद में इस पर चर्चा कराने का प्रयास करें। उनका मानना है कि यदि व्यापक विमर्श के बाद इस प्रणाली के उपयोगी प्रावधानों को स्वीकार किया जाता है, तो इससे देश की चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी, किफायती और सुव्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।
लेखक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चुनाव प्रणाली के सुधार हेतु एक रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस विषय पर सकारात्मक चर्चा होगी और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

संगम चुनाव प्रणाली पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने की मांग, लेखक ने कर्वी में प्रेस वार्ता कर जनप्रतिनिधियों से किया अनुरोध चित्रकूट। "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए चित्रकूट के लेखक द्वारा तैयार की गई "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में पहल की गई है। लेखक ने इस पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने तथा मीडिया के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाने की मांग की है। लेखक के अनुसार, "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक में चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 20 चरण, 36 नियम तथा 8 प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। उन्होंने आज गुरुवार की दोपहर 12 बजे कर्वी में मिडिया से बातचीत में कहा कि यदि इस प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। लेखक ने बताया कि पुस्तक की लगभग 100 प्रतियां पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, "एक देश, एक चुनाव" समिति के अध्यक्ष, संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। लेखक ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पुस्तक का अध्ययन करें, इसके विषय में सार्वजनिक रूप से अपने विचार रखें तथा संसद में इस पर चर्चा कराने का प्रयास करें। उनका मानना है कि यदि व्यापक विमर्श के बाद इस प्रणाली के उपयोगी प्रावधानों को स्वीकार किया जाता है, तो इससे देश की चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी, किफायती और सुव्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है। लेखक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चुनाव प्रणाली के सुधार हेतु एक रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस विषय पर सकारात्मक चर्चा होगी और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

Karwi, Chitrakoot | Jul 17, 2026

संगम चुनाव प्रणाली पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने की मांग, लेखक ने कर्वी में प्रेस वार्ता कर जनप्रतिनिधियों से किया अनुरोध
चित्रकूट। "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए चित्रकूट के लेखक द्वारा तैयार की गई "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में पहल की गई है। लेखक ने इस पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने तथा मीडिया के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाने की मांग की है।
लेखक के अनुसार, "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक में चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 20 चरण, 36 नियम तथा 8 प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। उन्होंने आज गुरुवार की दोपहर 12 बजे कर्वी में मिडिया से बातचीत में कहा  कि यदि इस प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।
लेखक ने बताया कि पुस्तक की लगभग 100 प्रतियां पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, "एक देश, एक चुनाव" समिति के अध्यक्ष, संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। 
लेखक ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पुस्तक का अध्ययन करें, इसके विषय में सार्वजनिक रूप से अपने विचार रखें तथा संसद में इस पर चर्चा कराने का प्रयास करें। उनका मानना है कि यदि व्यापक विमर्श के बाद इस प्रणाली के उपयोगी प्रावधानों को स्वीकार किया जाता है, तो इससे देश की चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी, किफायती और सुव्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।
लेखक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चुनाव प्रणाली के सुधार हेतु एक रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस विषय पर सकारात्मक चर्चा होगी और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

संगम चुनाव प्रणाली पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने की मांग, लेखक ने कर्वी में प्रेस वार्ता कर जनप्रतिनिधियों से किया अनुरोध चित्रकूट। "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए चित्रकूट के लेखक द्वारा तैयार की गई "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में पहल की गई है। लेखक ने इस पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने तथा मीडिया के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाने की मांग की है। लेखक के अनुसार, "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक में चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 20 चरण, 36 नियम तथा 8 प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। उन्होंने आज गुरुवार की दोपहर 12 बजे कर्वी में मिडिया से बातचीत में कहा कि यदि इस प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। लेखक ने बताया कि पुस्तक की लगभग 100 प्रतियां पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, "एक देश, एक चुनाव" समिति के अध्यक्ष, संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। लेखक ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पुस्तक का अध्ययन करें, इसके विषय में सार्वजनिक रूप से अपने विचार रखें तथा संसद में इस पर चर्चा कराने का प्रयास करें। उनका मानना है कि यदि व्यापक विमर्श के बाद इस प्रणाली के उपयोगी प्रावधानों को स्वीकार किया जाता है, तो इससे देश की चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी, किफायती और सुव्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है। लेखक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चुनाव प्रणाली के सुधार हेतु एक रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस विषय पर सकारात्मक चर्चा होगी और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

Karwi, Chitrakoot | Jul 17, 2026

संगम चुनाव प्रणाली पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने की मांग, लेखक ने कर्वी में प्रेस वार्ता कर जनप्रतिनिधियों से किया अनुरोध
चित्रकूट। "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए चित्रकूट के लेखक द्वारा तैयार की गई "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में पहल की गई है। लेखक ने इस पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने तथा मीडिया के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाने की मांग की है।
लेखक के अनुसार, "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक में चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 20 चरण, 36 नियम तथा 8 प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। उन्होंने आज गुरुवार की दोपहर 12 बजे कर्वी में मिडिया से बातचीत में कहा  कि यदि इस प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।
लेखक ने बताया कि पुस्तक की लगभग 100 प्रतियां पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, "एक देश, एक चुनाव" समिति के अध्यक्ष, संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। 
लेखक ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पुस्तक का अध्ययन करें, इसके विषय में सार्वजनिक रूप से अपने विचार रखें तथा संसद में इस पर चर्चा कराने का प्रयास करें। उनका मानना है कि यदि व्यापक विमर्श के बाद इस प्रणाली के उपयोगी प्रावधानों को स्वीकार किया जाता है, तो इससे देश की चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी, किफायती और सुव्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।
लेखक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चुनाव प्रणाली के सुधार हेतु एक रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस विषय पर सकारात्मक चर्चा होगी और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

संगम चुनाव प्रणाली पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने की मांग, लेखक ने कर्वी में प्रेस वार्ता कर जनप्रतिनिधियों से किया अनुरोध चित्रकूट। "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए चित्रकूट के लेखक द्वारा तैयार की गई "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में पहल की गई है। लेखक ने इस पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने तथा मीडिया के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाने की मांग की है। लेखक के अनुसार, "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक में चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 20 चरण, 36 नियम तथा 8 प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। उन्होंने आज गुरुवार की दोपहर 12 बजे कर्वी में मिडिया से बातचीत में कहा कि यदि इस प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। लेखक ने बताया कि पुस्तक की लगभग 100 प्रतियां पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, "एक देश, एक चुनाव" समिति के अध्यक्ष, संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। लेखक ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पुस्तक का अध्ययन करें, इसके विषय में सार्वजनिक रूप से अपने विचार रखें तथा संसद में इस पर चर्चा कराने का प्रयास करें। उनका मानना है कि यदि व्यापक विमर्श के बाद इस प्रणाली के उपयोगी प्रावधानों को स्वीकार किया जाता है, तो इससे देश की चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी, किफायती और सुव्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है। लेखक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चुनाव प्रणाली के सुधार हेतु एक रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस विषय पर सकारात्मक चर्चा होगी और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

Karwi, Chitrakoot | Jul 17, 2026

संगम चुनाव प्रणाली पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने की मांग, लेखक ने कर्वी में प्रेस वार्ता कर जनप्रतिनिधियों से किया अनुरोध
चित्रकूट। "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए चित्रकूट के लेखक द्वारा तैयार की गई "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में पहल की गई है। लेखक ने इस पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने तथा मीडिया के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाने की मांग की है।
लेखक के अनुसार, "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक में चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 20 चरण, 36 नियम तथा 8 प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। उन्होंने आज गुरुवार की दोपहर 12 बजे कर्वी में मिडिया से बातचीत में कहा  कि यदि इस प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।
लेखक ने बताया कि पुस्तक की लगभग 100 प्रतियां पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, "एक देश, एक चुनाव" समिति के अध्यक्ष, संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। 
लेखक ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पुस्तक का अध्ययन करें, इसके विषय में सार्वजनिक रूप से अपने विचार रखें तथा संसद में इस पर चर्चा कराने का प्रयास करें। उनका मानना है कि यदि व्यापक विमर्श के बाद इस प्रणाली के उपयोगी प्रावधानों को स्वीकार किया जाता है, तो इससे देश की चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी, किफायती और सुव्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।
लेखक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चुनाव प्रणाली के सुधार हेतु एक रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस विषय पर सकारात्मक चर्चा होगी और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

संगम चुनाव प्रणाली पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने की मांग, लेखक ने कर्वी में प्रेस वार्ता कर जनप्रतिनिधियों से किया अनुरोध चित्रकूट। "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए चित्रकूट के लेखक द्वारा तैयार की गई "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में पहल की गई है। लेखक ने इस पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने तथा मीडिया के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाने की मांग की है। लेखक के अनुसार, "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक में चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 20 चरण, 36 नियम तथा 8 प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। उन्होंने आज गुरुवार की दोपहर 12 बजे कर्वी में मिडिया से बातचीत में कहा कि यदि इस प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। लेखक ने बताया कि पुस्तक की लगभग 100 प्रतियां पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, "एक देश, एक चुनाव" समिति के अध्यक्ष, संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। लेखक ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पुस्तक का अध्ययन करें, इसके विषय में सार्वजनिक रूप से अपने विचार रखें तथा संसद में इस पर चर्चा कराने का प्रयास करें। उनका मानना है कि यदि व्यापक विमर्श के बाद इस प्रणाली के उपयोगी प्रावधानों को स्वीकार किया जाता है, तो इससे देश की चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी, किफायती और सुव्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है। लेखक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चुनाव प्रणाली के सुधार हेतु एक रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस विषय पर सकारात्मक चर्चा होगी और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

Karwi, Chitrakoot | Jul 17, 2026

संगम चुनाव प्रणाली पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने की मांग, लेखक ने कर्वी में प्रेस वार्ता कर जनप्रतिनिधियों से किया अनुरोध
चित्रकूट। "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए चित्रकूट के लेखक द्वारा तैयार की गई "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में पहल की गई है। लेखक ने इस पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने तथा मीडिया के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाने की मांग की है।
लेखक के अनुसार, "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक में चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 20 चरण, 36 नियम तथा 8 प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। उन्होंने आज गुरुवार की दोपहर 12 बजे कर्वी में मिडिया से बातचीत में कहा  कि यदि इस प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।
लेखक ने बताया कि पुस्तक की लगभग 100 प्रतियां पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, "एक देश, एक चुनाव" समिति के अध्यक्ष, संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। 
लेखक ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पुस्तक का अध्ययन करें, इसके विषय में सार्वजनिक रूप से अपने विचार रखें तथा संसद में इस पर चर्चा कराने का प्रयास करें। उनका मानना है कि यदि व्यापक विमर्श के बाद इस प्रणाली के उपयोगी प्रावधानों को स्वीकार किया जाता है, तो इससे देश की चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी, किफायती और सुव्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।
लेखक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चुनाव प्रणाली के सुधार हेतु एक रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस विषय पर सकारात्मक चर्चा होगी और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

संगम चुनाव प्रणाली पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने की मांग, लेखक ने कर्वी में प्रेस वार्ता कर जनप्रतिनिधियों से किया अनुरोध चित्रकूट। "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए चित्रकूट के लेखक द्वारा तैयार की गई "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में पहल की गई है। लेखक ने इस पुस्तक पर संसद में चर्चा कराने तथा मीडिया के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाने की मांग की है। लेखक के अनुसार, "संगम चुनाव प्रणाली" पुस्तक में चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 20 चरण, 36 नियम तथा 8 प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। उन्होंने आज गुरुवार की दोपहर 12 बजे कर्वी में मिडिया से बातचीत में कहा कि यदि इस प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह "एक देश, एक चुनाव" की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। लेखक ने बताया कि पुस्तक की लगभग 100 प्रतियां पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं, निर्वाचन आयोग, विधि आयोग, "एक देश, एक चुनाव" समिति के अध्यक्ष, संसदीय समिति के अध्यक्ष तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। लेखक ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पुस्तक का अध्ययन करें, इसके विषय में सार्वजनिक रूप से अपने विचार रखें तथा संसद में इस पर चर्चा कराने का प्रयास करें। उनका मानना है कि यदि व्यापक विमर्श के बाद इस प्रणाली के उपयोगी प्रावधानों को स्वीकार किया जाता है, तो इससे देश की चुनाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी, किफायती और सुव्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है। लेखक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चुनाव प्रणाली के सुधार हेतु एक रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस विषय पर सकारात्मक चर्चा होगी और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

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