Public App Logo
Jansamasya
News
पुलिस
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
India
Gujarat
भाजपा
Congress
Modi
Delhi
Viral
Bollywood
दिल्ली
Patna
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Madhyapradesh
Pmmodi
Rahulgandhi
यूपी
Bhopal
सपा
Uttarpradesh
Haryana
Hardoi

मुरैना में फुटपाथ निर्माण पर बवाल, घटिया गुणवत्ता का आरोप; ग्रामीणों और भीम आर्मी ने रुकवाया काम मुरैना। मुरैना में बेरियल चौराहे से मुरैना गांव तक चल रहे फुटपाथ (पेवर ब्लॉक) निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए काम रुकवा दिया। उनका आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि जहां कंक्रीट का उपयोग किया जाना चाहिए, वहां मिट्टी और निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। जब मौके पर मौजूद सुपरवाइजर से निर्माण का एस्टीमेट और स्वीकृत मानक (स्पेसिफिकेशन) दिखाने को कहा गया तो उन्होंने बताया कि एस्टीमेट ठेकेदार के पास है। वहीं, आरोप है कि ठेकेदार ने कहा कि उनके पास कोई एस्टीमेट उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों और भीम आर्मी के पदाधिकारियों का आरोप है कि यदि एस्टीमेट और स्वीकृत मानकों की जानकारी उपलब्ध नहीं है तो निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय नेताओं की मिलीभगत से ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहर की कंपनी द्वारा कार्य किया जा रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। विरोध के दौरान लोगों ने मांग की कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियर श्री विष्णु से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका कॉल रिसीव नहीं हुआ। वहीं, आरोप है कि सुपरवाइजर ने तकनीकी जानकारी देने के बजाय स्थानीय नेताओं से बात कराने का प्रयास किया। फिलहाल ग्रामीणों और भीम आर्मी के विरोध के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है। लोगों का कहना है कि जब तक गुणवत्ता की जांच नहीं होगी और मानकों के अनुरूप निर्माण का आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा।

Gwalior Gird, Gwalior | Aug 3, 2026

MORE NEWS

मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?'

मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है।

वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?' मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

Gwalior Gird, Gwalior | Aug 3, 2026

मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?'

मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है।

वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?' मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

Gwalior Gird, Gwalior | Aug 3, 2026

मुरैना में फुटपाथ निर्माण पर बवाल, घटिया गुणवत्ता का आरोप; ग्रामीणों और भीम आर्मी ने रुकवाया काम मुरैना। मुरैना में बेरियल चौराहे से मुरैना गांव तक चल रहे फुटपाथ (पेवर ब्लॉक) निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए काम रुकवा दिया। उनका आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि जहां कंक्रीट का उपयोग किया जाना चाहिए, वहां मिट्टी और निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। जब मौके पर मौजूद सुपरवाइजर से निर्माण का एस्टीमेट और स्वीकृत मानक (स्पेसिफिकेशन) दिखाने को कहा गया तो उन्होंने बताया कि एस्टीमेट ठेकेदार के पास है। वहीं, आरोप है कि ठेकेदार ने कहा कि उनके पास कोई एस्टीमेट उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों और भीम आर्मी के पदाधिकारियों का आरोप है कि यदि एस्टीमेट और स्वीकृत मानकों की जानकारी उपलब्ध नहीं है तो निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय नेताओं की मिलीभगत से ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहर की कंपनी द्वारा कार्य किया जा रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। विरोध के दौरान लोगों ने मांग की कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियर श्री विष्णु से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका कॉल रिसीव नहीं हुआ। वहीं, आरोप है कि सुपरवाइजर ने तकनीकी जानकारी देने के बजाय स्थानीय नेताओं से बात कराने का प्रयास किया। फिलहाल ग्रामीणों और भीम आर्मी के विरोध के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है। लोगों का कहना है कि जब तक गुणवत्ता की जांच नहीं होगी और मानकों के अनुरूप निर्माण का आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। - Gwalior Gird News